अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा तय, क्या सुलझ जाएगा टैरिफ विवाद का पेच?

India News: भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक नया और बड़ा मोड़ आने वाला है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले महीने यानी मई में भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। इस महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे टैरिफ विवाद को सुलझाना है। वॉशिंगटन में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और मार्को रूबियो के बीच हुई सफल बैठक के बाद इस दौरे के संकेत मिले हैं। यह यात्रा वैश्विक राजनीति और व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है।

व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय बैठक

हाल ही में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। वार्ता के दौरान रक्षा, व्यापार और उभरती तकनीकों जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस मुलाकात की पुष्टि सोशल मीडिया के जरिए की है। उन्होंने बताया कि यह बैठक सकारात्मक रही और दोनों पक्ष रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

टैरिफ विवाद को सुलझाने की बड़ी कोशिश

पिछले कुछ महीनों में सीमा शुल्क यानी टैरिफ नीतियों को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कुछ दूरियां आई थीं। व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच खींचतान बढ़ने से रणनीतिक रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका थी। हालांकि, मार्को रूबियो का यह दौरा उन कड़वाहटों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि व्यापारिक बाधाओं को हटाकर दोनों देश आर्थिक मोर्चे पर फिर से करीब आ सकते हैं। इस दौरे पर होने वाली चर्चा का सीधा असर वैश्विक बाजार और सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

राजदूत सर्जियो गोर ने दी आधिकारिक जानकारी

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर रूबियो की यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि विदेश मंत्री अगले महीने भारत आने को लेकर काफी उत्साहित हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से अभी इस दौरे की सटीक तारीखों का खुलासा नहीं किया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अभी इस पर अपनी आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। लेकिन राजदूत के बयान ने यह साफ कर दिया है कि मई का महीना भारत-अमेरिका दोस्ती के लिए निर्णायक साबित होने वाला है।

रक्षा सहयोग और ‘क्वाड’ पर रहेगा मुख्य फोकस

रूबियो और मिस्री की बातचीत में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के मुद्दे भी प्रमुखता से छाए रहे। दोनों देशों के बीच ‘क्वाड’ (QUAD) समूह को मजबूत करने और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई सुनिश्चित करने पर बात हुई। पर्शियन गल्फ सहित दुनिया के मौजूदा क्षेत्रीय संघर्षों पर भी अमेरिका और भारत ने अपना साझा नजरिया दोहराया। उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ के साथ हुई बैठक में भी भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी को भविष्य की जरूरत बताया गया। यह रूबियो का पदभार संभालने के बाद पहला भारत दौरा होगा।

बदलते दौर में मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी

बीते एक साल में अमेरिकी प्रशासन के कई बड़े चेहरे भारत का दौरा कर चुके हैं। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जैसे दिग्गज नेताओं के नाम भी शामिल हैं। मार्को रूबियो की आगामी यात्रा यह साबित करती है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में देखता है। व्यापारिक गतिरोध के बावजूद रणनीतिक स्तर पर दोनों देशों का एक साथ आना चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ा संकेत है। आगामी मई माह में होने वाले इस दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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