World News: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर लागू हो गया है। इसके बावजूद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दुनिया में भारी सस्पेंस है। सीजफायर के बाद कुछ जहाजों ने इस समुद्री रास्ते को पार किया। लेकिन लेबनान पर इजरायली हमले के बाद ईरान ने इसे फिर से बंद कर दिया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच मतभेद गहरा गए हैं। समंदर में लगा भारी महाजाम जल्द खत्म होने की उम्मीद अब धूमिल पड़ गई है।
ट्रंप का ऐलान और ईरान का रुख
बुधवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सीजफायर का अहम ऐलान किया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से नाकाबंदी थोड़ी ढीली कर दी थी। मरीन ट्रैफिक के अनुसार दो बड़े जहाज यहां से सुरक्षित निकल गए। लाइबेरिया का जहाज डेटोना बीच दोपहर को बाहर निकला। इसके बाद ग्रीस का एनजे अर्थ जहाज भी होर्मुज पार कर गया। लेकिन लेबनान पर हमले के कड़े विरोध में ईरान ने रास्ता दोबारा पूरी तरह बंद कर दिया।
समंदर में फंसे सैकड़ों जहाज और तेल संकट
शिप ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के ताजा आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण खाड़ी में करीब आठ सौ जहाज पूरी तरह फंस गए हैं। इनमें एक सौ सतासी ऑयल टैंकर भी शामिल हैं। इन टैंकरों में सत्रह करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और रिफाइंड उत्पाद भरा है। ये सभी जहाज अभी भी खाड़ी में खड़े हैं। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बहुत बड़े और गंभीर झटके से कम बिल्कुल नहीं है।
जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
मार्च की शुरुआत से अप्रैल के पहले हफ्ते तक होर्मुज से बहुत कम जहाज निकले। इस दौरान रोजाना औसतन केवल आठ कमोडिटी कैरियर ही यहां से गुजर पाए। युद्ध शुरू होने के बाद जहाजों की आवाजाही पचानवे प्रतिशत तक गिर गई है। पहले इस रास्ते से दुनिया में रोजाना दो करोड़ बैरल तेल पहुंचता था। अब यह आपूर्ति घटकर केवल छब्बीस लाख बैरल तक सिमट गई है। इससे दुनिया में भारी ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है।
भारत के जहाज और नाविक भी संकट में
इस भारी समुद्री जाम में भारत को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक होर्मुज में भारत के सोलह जहाज अभी भी फंसे हुए हैं। इनमें कच्चे तेल के पांच टैंकर और प्राकृतिक गैस का जहाज शामिल है। इन जहाजों के साथ चार सौ तैंतीस भारतीय नाविक भी समंदर में फंस गए हैं। हालांकि युद्ध छिड़ने के बाद भारत के आठ एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने में सफल रहे हैं।
हमलों के डर से सहमे जहाज मालिक
युद्ध शुरू होने के बाद से तीन सौ सात जहाजों ने होर्मुज पार किया है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार हाल ही में तीस जहाजों को निशाना बनाया गया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कुछ नए हमलों का दावा किया है। ईरान के कड़े तेवर देखकर जहाज मालिक अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। सीजफायर के बाद भी तेल टैंकर आगे नहीं बढ़े। ईरान द्वारा रास्ता बंद करना इस वैश्विक संकट को और गंभीर बना रहा है।

