International News: खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच ईरान एक बेहद अजीबोगरीब और खतरनाक स्थिति में फंस गया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने सामरिक बढ़त बनाने के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) में जो समुद्री माइंस बिछाई थीं, अब वह उनकी सटीक लोकेशन भूल गया है। इस लापरवाही के कारण ईरान खुद इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने में असमर्थ नजर आ रहा है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है। अब अपनी ही बिछाई माइंस ईरान के जहाजों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए काल बन सकती हैं।
अपनी ही रणनीति के जाल में उलझा तेहरान
ईरानी नौसेना ने कुछ समय पहले अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को डराने के लिए जलमार्ग में सैकड़ों घातक माइंस तैनात की थीं। इन माइंस का मकसद दुश्मन के जहाजों को रोकना था। हालांकि, अब खबर आ रही है कि तकनीकी खामियों या खराब रिकॉर्ड कीपिंग की वजह से ईरानी अधिकारी यह भूल गए हैं कि कौन सी माइन कहां स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र की लहरों और करंट के कारण ये माइंस अपनी जगह से खिसक गई हैं। इससे पूरे क्षेत्र में नौवहन के लिए एक आत्मघाती स्थिति पैदा हो गई है।
दुनिया के तेल व्यापार पर मंडराया सबसे बड़ा संकट
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह संकरा रास्ता है जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यदि यह मार्ग माइंस के कारण लंबे समय तक बाधित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए हथियार बनाया था, लेकिन अब यह उसके लिए गले की हड्डी बन गया है। बिना माइंस हटाए इस रास्ते से गुजरना किसी भी टैंकर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़े मंदी के दौर में धकेल सकती है।
अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय नौसेनाओं की बढ़ी चिंता
इस खुलासे के बाद अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगी देशों ने भी अपनी चौकसी बढ़ा दी है। समुद्र के नीचे छिपी इन अज्ञात माइंस को ढूंढना और उन्हें नष्ट करना एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि माइंस की लोकेशन न मिलने से ‘माइन स्वीपिंग’ (Mine Sweeping) ऑपरेशन में महीनों का समय लग सकता है। अमेरिका ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान की इस तरह की हरकतें अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का खुला उल्लंघन हैं। अब पूरी दुनिया ईरान की इस लापरवाही का खामियाजा भुगतने के कगार पर खड़ी है।
ईरान की सैन्य क्षमताओं और साख पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना ईरान की सैन्य योजना और डेटा प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर करती है। एक तरफ ईरान खुद को एक बड़ी क्षेत्रीय ताकत बताता है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की बुनियादी गलती उसकी साख को कमजोर करती है। ईरानी सेना के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर भारी तनाव होने की खबरें हैं। वरिष्ठ अधिकारी अब उन टीमों की तलाश कर रहे हैं जिन्होंने इन माइंस को बिछाने का काम किया था। यह चूक न केवल ईरान को रणनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि उसे दुनिया के सामने हंसी का पात्र भी बना रही है।
क्या होगा अगला कदम और कैसे सुलझेगी यह गुत्थी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस संकट से निकलने का रास्ता क्या होगा। यदि ईरान मदद नहीं मांगता है, तो उसे खुद अपने गोताखोरों और रिमोट संचालित वाहनों को जोखिम में डालना होगा। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय दबाव बना रहा है कि ईरान जल्द से जल्द इस रास्ते को सुरक्षित करे। कई देशों ने मांग की है कि इस ऑपरेशन के लिए एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय कार्यबल का गठन किया जाना चाहिए। अगले कुछ दिन इस बात के लिए निर्णायक होंगे कि क्या यह जलमार्ग सुरक्षित रूप से खुल पाएगा या फिर समंदर में कोई बड़ा धमाका होगा।

