India News: ईरान के नए टोल टैक्स की खबरों ने दुनिया में भारी खलबली मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में एक बड़ा दावा सामने आया है। ईरान अहम समुद्री रास्ते से निकलने वाले जहाजों से भारी शुल्क वसूल सकता है। यह रकम बीस लाख डॉलर तक होने का अनुमान है। हालांकि भारत सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मामले की स्थिति को एकदम स्पष्ट कर दिया है।
भारत सरकार ने दावों को किया पूरी तरह खारिज
इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने सरकार का साफ पक्ष रखा है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि भारत और ईरान के बीच टोल टैक्स पर कोई बात नहीं हुई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सभी खबरें सिर्फ अफवाह हैं। दोनों देशों के बीच किसी नए शुल्क पर अब तक औपचारिक चर्चा शुरू नहीं हुई है।
ईरान की संसद में चल रही है बड़ी तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स इस मामले में कुछ नई जानकारी देती हैं। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शुल्क लगाने की योजना पर गंभीर विचार कर रहा है। कहा जा रहा है कि ईरान की संसद में इस प्रस्ताव पर जोरदार बहस चल रही है। वहां की संसद इसे जल्द ही अंतिम मंजूरी दे सकती है। इसके लागू होने पर हर कमर्शियल जहाज को भारी टोल देना पड़ेगा। यह रकम लाखों डॉलर तक पहुंच सकती है।
ओमान भी इस अहम रास्ते पर मांग सकता है हिस्सा
कई अंतरराष्ट्रीय सूत्रों ने एक नया दावा भी किया है। इस रास्ते पर ईरान के साथ ओमान भी अपना शुल्क वसूल कर सकता है। हालिया युद्धविराम के बाद इस क्षेत्र में नई व्यवस्था बनाई जा रही है। इस नए नियंत्रण ढांचे को बहुत जल्द ही औपचारिक रूप दिया जाएगा। इस फैसले से ईरान और ओमान दोनों को बहुत बड़ा फायदा होगा। दोनों देशों को भारी राजस्व का एक नया स्रोत आसानी से मिल जाएगा।
वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे खास तेल परिवहन मार्गों में आता है। यहां कोई शुल्क लागू होता है तो असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। कई बड़े ऊर्जा विशेषज्ञों ने इस कड़े फैसले पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत काफी तेजी से बढ़ेगी। इससे पूरी दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आसानी से आ सकता है।
ईरान ने पहले भारतीय व्यापारिक जहाजों को दी थी छूट
पश्चिम एशिया में भारी संघर्ष के दौरान ईरान ने भारत की मदद की थी। ईरान ने भारत के व्यापारिक जहाजों को एक सुरक्षित रास्ता दिया था। उस समय भारतीय जहाजों ने बिना रुकावट तेल की आपूर्ति जारी रखी थी। फिलहाल इस नए टोल प्रस्ताव पर ईरान की आधिकारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार है। भारत सरकार लगातार इस अहम मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

