परमाणु बम से भी बड़ा है ईरान का खौफनाक ‘सीक्रेट प्लान’, आसमान से मौत बरसाने की तैयारी में तेहरान!

World News: मध्य पूर्व में तनाव अब एक खौफनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दुनिया की नजरें मिसाइलों और परमाणु बमों पर टिकी हैं। पर्दे के पीछे ईरान भयानक और अदृश्य तबाही की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में डराने वाले खुलासे सामने आए हैं। अमेरिका का दावा है कि ईरान गुप्त रूप से रासायनिक और जैविक हथियारों का भंडार बना रहा है। ये घातक हथियार पूरी दुनिया को श्मशान में बदल सकते हैं।

होर्मुज की खाड़ी से बड़ा है यह अदृश्य खतरा

अभी तक युद्ध का मतलब केवल सीमाओं पर लड़ाई या तेल ठिकानों पर हमले माना जाता था। जानकारों का मानना है कि होर्मुज की खाड़ी बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी। लेकिन अब असली डर नागरिक इलाकों में होने वाली जहरीली बारिश का है। अमेरिका को पूरा शक है कि ईरान अपनी सत्ता खतरे में देखकर इन हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। वह सीधे तौर पर या अपने प्रॉक्सी गुटों के जरिए दुनिया भर में यह तबाही मचा सकता है।

हकीमान शार्ग रिसर्च कंपनी पर लगा अमेरिकी बैन

अमेरिका ने हाल ही में बारह जुलाई को एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने ईरान की हकीमान शार्ग रिसर्च कंपनी पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कंपनी बाहर से केवल एक साधारण रिसर्च केंद्र लगती है। लेकिन अमेरिका का आरोप है कि यह कंपनी ईरान के रासायनिक हथियार कार्यक्रम की मुख्य रीढ़ है। यहां दवा के नाम पर बहुत घातक रसायन तैयार किए जा रहे हैं। ये रसायन इंसान के नर्वस सिस्टम को तुरंत पंगु बना सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा तेहरान

ईरान ने रासायनिक हथियार सम्मेलन के सभी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई हैं। इसके बाद ही अमेरिका ने यह सख्त एक्शन लिया है। यह प्रतिबंध दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। खतरा अब प्रयोगशालाओं से निकलकर मैदान में आने वाला है। ईरान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार झूठ बोलने का गंभीर आरोप है। साल दो हजार अठारह से ईरान ने अपनी रासायनिक गतिविधियों की कोई भी जानकारी दुनिया के साथ साझा करना पूरी तरह से बंद कर दिया है।

भीड़ नियंत्रण के बहाने तैयार हो रही साइलेंट मौत

अमेरिका का पुख्ता दावा है कि ईरान भीड़ नियंत्रण के बहाने जहरीले हथियार बना रहा है। उसने ऐसे जैविक और रासायनिक हथियार तैयार किए हैं जो बेहद खतरनाक हैं। खुफिया एजेंसियों को खबर मिली है कि ईरान ने इन हथियारों की खेप लीबिया भी भेजी थी। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बारे में दुनिया को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि संधियों का हिस्सा होने के बावजूद ईरान अपनी जहरीली ताकत को लगातार तेजी से बढ़ा रहा है।

खुफिया एजेंसी सीआईए ने बहुत पहले किया था आगाह

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने साल दो हजार चार में ही दुनिया को इस खतरे से आगाह कर दिया था। उस समय बताया गया था कि ईरान के पास जैविक हथियार बनाने की पूरी क्षमता मौजूद है। उसने अपनी जैव प्रौद्योगिकी को बहुत ही खतरनाक तरीके से विकसित किया है। ईरान दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक से घातक वायरस और बैक्टीरिया पैदा कर सकता है। अमेरिका ने कई बार कहा है कि ईरान के जहरीले एजेंट किसी भी महामारी से बहुत ज्यादा खतरनाक साबित होंगे।

इराक युद्ध के पुराने जख्मों से ईरान ने ली प्रेरणा

ईरान ने इन हथियारों का रास्ता क्यों चुना, इसका जवाब इतिहास में दर्ज है। ईरान और इराक के बीच आठ साल तक भीषण युद्ध चला था। उस समय इराक ने ईरान पर बहुत खतरनाक रासायनिक हमले किएेक्ट थे। उन हमलों में हजारों ईरानी नागरिक तड़प कर मारे गए थे। उसी समय ईरान ने तय किया कि वह भी मारक क्षमता बनाएगा। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने युद्ध से सबक लेकर अपना रासायनिक साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

यूरेनियम संवर्धन की आड़ में छिप रहा बड़ा सच

इस समय पूरी दुनिया का ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर है। सभी देश ईरान को यूरेनियम संवर्धन से रोकने में लगे हैं। अमेरिका और इजरायल का ध्यान भी ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर केंद्रित है। रक्षा विशेषज्ञ इसे केवल एक छलावा मानते हैं। दुनिया परमाणु कार्यक्रम रोकने में व्यस्त है और ईरान चुपचाप अपने जैविक हथियार बना रहा है। हवा या पानी में यह जानलेवा जहर घुलने से बचना इंसान के लिए बिल्कुल नामुमकिन हो जाएगा।

दमघन और कजविन के सीक्रेट प्लांट में बन रहा जहर

ईरान ने अपने रासायनिक हथियारों का उत्पादन बहुत पहले शुरू कर दिया था। तेहरान के पास दमघन, कजविन, परचिन और इस्फहान जैसे इलाकों में विशाल प्लांट हैं। इन गुप्त ठिकानों पर हर साल एक हजार टन तक जहरीले रसायन बनते हैं। खुफिया एजेंसियां मानती हैं कि ईरान के पास भारी मात्रा में रासायनिक पदार्थों का भंडार है। ये भयंकर रसायन शरीर में फफोले पैदा करते हैं। साथ ही यह जहर इंसान के नर्वस सिस्टम को हमेशा के लिए बर्बाद कर देता है।

पूर्व सोवियत वैज्ञानिकों की मदद से चल रहा खतरनाक खेल

ईरान का जैविक हथियार कार्यक्रम रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कड़ी देखरेख में चल रहा है। इस खतरनाक काम को तेज करने के लिए ईरान ने पूर्व सोवियत संघ के वैज्ञानिकों की मदद ली है। ये वैज्ञानिक रोगाणु युद्ध के बड़े विशेषज्ञ माने जाते हैं। ईरान ने यूरोपीय देशों से चोरी से खतरनाक फंगस खरीदे हैं। इनका सीधा इस्तेमाल बड़े जैविक हमले के लिए हो सकता है। यह दुनिया की पूरी आबादी की सुरक्षा के साथ एक बहुत बड़ा जानलेवा खिलवाड़ है।

ड्रोन और मिसाइलों के जरिए जैविक हमले की फिराक में ईरान

ईरान की मुख्य ताकत उसकी मिसाइलें और ड्रोन हैं। दुनिया को डर है कि ईरान इन हथियारों में रासायनिक पेलोड लगा रहा है। अब जब कोई ड्रोन गिरेगा तो वह इलाके में जानलेवा वायरस फैला देगा। रिपोर्ट के अनुसार ईरान ऐसे रसायनों पर रिसर्च कर रहा है जो दिमाग को सुन्न कर देते हैं। इन घातक हथियारों को पानी में मिलाकर भी भारी तबाही मचाई जा सकती है। यह पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा और अदृश्य खतरा बन चुका है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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