World News: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच भयंकर युद्ध चल रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ी नाकेबंदी कर दी है। इससे पूरी दुनिया में तेल का भारी संकट खड़ा हो गया है। इस खौफनाक हालात के बीच सऊदी अरब ने दुनिया को एक बड़ी राहत दी है। सऊदी ने अपनी 45 साल पुरानी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। इस पाइपलाइन ने ईरान की नाकेबंदी को पूरी तरह से बेअसर कर दिया है। इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो गई है।
ईरान की नाकेबंदी से 20 प्रतिशत तेल सप्लाई हुई थी ठप
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार की सबसे बड़ी जीवन रेखा है। ईरान ने युद्ध के कारण इस अहम रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया था। इससे ग्लोबल मार्केट की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई अचानक रुक गई। दुनिया भर के देशों में हाहाकार मच गया। तेल की कमी से कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा था। पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगे थे। ऐसा लग रहा था मानो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था जल्द ही थम जाएगी।
सऊदी की 45 साल पुरानी पाइपलाइन बनी दुनिया की तारणहार
इस भारी संकट के बीच सऊदी अरब ने एक बहुत ही स्मार्ट कूटनीतिक चाल चली। सऊदी ने लाल सागर के तट पर स्थित अपनी पुरानी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को तुरंत चालू कर दिया। यह पाइपलाइन सीधे यनबू बंदरगाह तक जाती है। अब इस पाइपलाइन से हर दिन 3.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल सुरक्षित तरीके से बाहर जा रहा है। सऊदी अरामको कंपनी ने इस सप्लाई को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। इसका मुख्य लक्ष्य 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की सप्लाई तक पहुंचना है।
कच्चे तेल की कीमतें 112 डॉलर के पार, खतरा अब भी बरकरार
सऊदी अरब की इस तरकीब से दुनिया को फौरी तौर पर बड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा अभी भी पूरी तरह से टला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर युद्ध और भड़का तो यह वैकल्पिक रास्ता भी सुरक्षित नहीं रहेगा। दुनिया के तमाम बड़े देश अब इस संकट का स्थायी समाधान खोजने में पूरी तरह से जुट गए हैं।


