World News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने नया मोड़ ले लिया है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिका के सबसे आधुनिक रडार को नष्ट कर दिया है। इस घटना ने अमेरिकी रक्षा प्रणाली की कमजोरी उजागर कर दी है। इसके साथ ही चीन की नींद भी उड़ गई है। बीजिंग अब अपनी सुरक्षा को लेकर गहरे खौफ में है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर में चीनी रडार भी भारी खतरे में हैं।
अमेरिका का अजेय रडार हुआ खाक
ईरान ने जॉर्डन के मुवाफ्फाक सलती एयर बेस पर जोरदार हमला किया। इस हमले में अमेरिका का शक्तिशाली रडार सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गया। दुनिया भर में इस रडार को सबसे बेहतरीन निगरानी तंत्र माना जाता था। पेंटागन भी इस नुकसान से काफी हैरान है। ईरान ने साबित कर दिया कि कोई भी तकनीक पूरी तरह अजेय नहीं होती है। इस भयानक घटना ने पश्चिम एशिया के युद्ध के मैदान में एक नई बहस छेड़ दी है।
अलग-थलग सिस्टम बना आसान शिकार
रक्षा विशेषज्ञों ने इस अमेरिकी रडार की तबाही का मुख्य कारण खोज लिया है। यह रडार एक बड़े और एकीकृत सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा नहीं था। यह शक्तिशाली रडार सिस्टम अकेला ही काम कर रहा था। ईरान ने इसी बड़ी खामी का पूरा फायदा उठाया। बिना किसी सहयोगी सुरक्षा चक्र के यह रडार एक आसान निशाना बन गया। आधुनिक युद्ध में एकीकृत सिस्टम का होना बेहद जरूरी है। इसके बिना सबसे आधुनिक मशीनें भी बेकार साबित हो जाती हैं।
चीन के दावों की खुली पोल
हांगकांग के मशहूर अखबार एशिया टाइम्स ने एक नई रिपोर्ट छापी है। इस रिपोर्ट ने चीन के अजेय होने के दावों की हवा निकाल दी है। चीन ने दक्षिण चीन सागर में रडार का बहुत बड़ा जाल बिछाया है। लेकिन चीन का यह नेटवर्क भी बिल्कुल अमेरिकी रडार की तरह अलग-थलग है। ये रडार एक-दूसरे से रियल-टाइम डेटा साझा नहीं करते हैं। दुश्मन के हमले के समय ये रडार एक-दूसरे की कोई मदद नहीं कर सकते हैं।
समंदर में बिखरा चीनी नेटवर्क
चीन ने विवादित द्वीपों पर अपना खुफिया और निगरानी सिस्टम तैनात किया है। इसे इंटेलिजेंस और रिकॉनिसेंस सिस्टम कहा जाता है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी आपस में मजबूत जुड़ाव का न होना है। ये सभी रडार समंदर में अलग-अलग टापुओं की तरह काम करते हैं। रडार अपनी तरंगों के कारण दुश्मन की नजर में बहुत जल्दी आ जाते हैं। बिना एकीकृत सुरक्षा के ये चीनी रडार किसी भी युद्ध की शुरुआत में आसानी से ढेर हो सकते हैं।
भौगोलिक विस्तार बन रहा बड़ी बाधा
दक्षिण चीन सागर का विशाल भौगोलिक क्षेत्र चीन के लिए एक बड़ी चुनौती है। रडार तकनीक की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं। इन सीमाओं के कारण चीन के लिए सूचना प्रभुत्व हासिल करना लगभग नामुमकिन है। चीन अक्सर पूरे समंदर पर पैनी नजर रखने का दावा करता है। लेकिन हकीकत में उसके सिस्टम एक ही नेटवर्क पर काम नहीं करते हैं। इसी तकनीकी खामी के कारण चीन की पूरी रक्षा क्षमता अभी भी आधी-अधूरी ही मानी जा रही है।
अमेरिका और पड़ोसियों को मिला मौका
ईरान के इस सटीक हमले ने अमेरिका और सहयोगी देशों को एक नया रास्ता दिखा दिया है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अब चीन की कमजोरियों को अच्छे से समझ चुके हैं। भविष्य के किसी भी युद्ध में विरोधी देश चीन को आसानी से चुनौती दे सकते हैं। वे चीन के रडार नेटवर्क को शुरुआती दौर में ही पंगु बना सकते हैं। अब देखना होगा कि चीन समय रहते अपनी इन गंभीर तकनीकी खामियों को भविष्य में कैसे दूर कर पाता है।


