ट्रंप की कुर्सी पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा! ईरान को दी ‘गाली’ तो अपनों ने ही की हटाने की मांग

US News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नए विवाद में बुरी तरह फंस गए हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। इसके बाद अमेरिका में भारी राजनीतिक भूचाल आ गया है। विपक्षी सांसद अब ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने की कड़ी मांग कर रहे हैं। इसके लिए संविधान के पच्चीसवें संशोधन का सहारा लिया जा सकता है। कम से कम पांच सांसदों ने ट्रंप को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में पूरी तरह अक्षम करार दिया है।

ईरान पर अपशब्द और भड़का अमेरिकी विपक्ष

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक भारी विवादित पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान को लेकर बहुत ही अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। राष्ट्रपति के इस भड़काऊ बयान के बाद अमेरिकी विपक्ष बुरी तरह भड़क गया है। यूएस स्टेट रिप्रजेंटेटिव बेक्का बालिंट ने ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ओबामा या बाइडेन ने ऐसा कहा होता तो रिपब्लिकन क्या करते। बालिंट ने ट्रंप को पद से तुरंत हटाने की कड़ी मांग की है।

दिग्गज सांसदों ने बताया ट्रंप को पागल

सीनेटर क्रिस मर्फी ने इस मुद्दे पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर वे ट्रंप कैबिनेट में होते तो वकीलों से बात करते। वे पच्चीसवें संशोधन को लागू करने पर जोर देते। मर्फी ने आरोप लगाया कि ट्रंप लोगों की हत्या करने पर उतारू हैं। कांग्रेस सदस्य यास्मीन अंसारी ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी तरह पागल बताया है। अंसारी ने कहा कि अब उनके खिलाफ प्रस्ताव लाने का सबसे सही समय है।

पूरी दुनिया के लिए बना बड़ा खतरा

विपक्षी नेताओं का मानना है कि ट्रंप की वजह से आज पूरी दुनिया भारी खतरे में है। रिप्रजेंटेटिव मेलेनी स्टांसबेरी ने इस मामले पर एक बहुत ही सख्त बयान दिया है। उनके अनुसार अब हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं। स्टांसबेरी ने कहा कि यही सही वक्त है जब कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। अगर अब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पानी सिर से ऊपर चला जाएगा। इन कड़े बयानों से व्हाइट हाउस में भारी हड़कंप मच गया है।

क्या है अमेरिका का पच्चीसवां संशोधन?

अमेरिका में राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए विशेष कानून बनाया गया है। इसे संविधान के पच्चीसवें संशोधन के रूप में जाना जाता है। इस अहम कानून में राष्ट्रपति की मौत या उनके अक्षम होने की स्थिति का साफ जिक्र है। अगर राष्ट्रपति अपना काम करने में असमर्थ हो जाएं तो यह नियम लागू होता है। इसके बाद उपराष्ट्रपति बचे हुए कार्यकाल के लिए सत्ता संभालते हैं। यह अहम संशोधन देश को किसी भी बड़े संवैधानिक संकट से पूरी तरह बचाता है।

कानून लागू करने की क्या है प्रक्रिया?

इस कड़े कानून को लागू करने की एक तय प्रक्रिया है। सबसे पहले कैबिनेट को इस संबंध में एक अहम प्रस्ताव लाना होता है। यदि राष्ट्रपति प्रस्ताव का विरोध करते हैं तो मामला संसद में जाता है। इसके बाद सीनेट और कांग्रेस के सदस्य इस प्रस्ताव पर वोटिंग करते हैं। यदि दो तिहाई सदस्य इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दें, तो राष्ट्रपति को कुर्सी तुरंत छोड़नी पड़ती है। यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से बहुत ही ज्यादा जटिल और लंबी मानी जाती है।

विवाद के बीच छुट्टी पर गए ट्रंप

ईरान के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के बाद भारी विवाद जारी है। इसी बीच खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप तीन दिन की छुट्टी पर चले गए हैं। मीडिया संस्थान एक्सप्रेस यूके ने अपनी रिपोर्ट में यह बड़ा दावा किया है। ट्रंप के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में कई नई अटकलें तेज हो गई हैं। विपक्षी दल उन पर लगातार हमलावर हैं और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन अमेरिकी राजनीति के लिए बहुत ही ज्यादा अहम होने वाले हैं।

मध्य पूर्व के हालात पर पड़ेगा बुरा असर

डोनाल्ड ट्रंप के इस भड़काऊ बयान का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इससे ईरान के साथ चल रहा तनाव और ज्यादा भड़क सकता है। अमेरिका के सहयोगी देश भी ट्रंप के इस कड़े रवैये से काफी परेशान हैं। कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को इस बयान का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। विपक्षी सांसदों ने साफ कहा है कि इस तरह की आक्रामक भाषा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका की छवि को बहुत ज्यादा खराब कर रही है।

आगे क्या कदम उठाएगा अमेरिकी विपक्ष?

अब सबकी निगाहें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के अगले अहम कदम पर टिकी हैं। संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर लगातार गुप्त बैठकें चल रही हैं। जनता के बीच भी ट्रंप की इस विवादित भाषा को लेकर भारी गुस्सा है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे हैं। अगर कैबिनेट ट्रंप के खिलाफ प्रस्ताव नहीं लाती है, तो विपक्ष अपना दबाव और तेज करेगा। यह पूरा मामला जल्द ही एक बहुत बड़े राजनीतिक संकट में बदल सकता है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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