अमेरिका को चकमा देकर चीन ने निकाला ईरान का यूरेनियम? रेस्क्यू मिशन के बीच हुआ बड़ा खेल

World News: मिडिल ईस्ट में चल रही भीषण जंग के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। दावा है कि जब अमेरिका अपने F15 ईगल पायलट को बचाने में व्यस्त था, तब चीन ने ईरान में एक बेहद गुप्त ऑपरेशन को अंजाम दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के कार्गो विमानों ने चुपचाप ईरान से यूरेनियम बाहर निकाल लिया है। इस कथित ऑपरेशन ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। इसे सीधे तौर पर वॉशिंगटन को दी गई एक बड़ी सामरिक चुनौती माना जा रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन की आड़ में चीनी चाल

पूरी दुनिया की नजरें उस वक्त अमेरिका के रेस्क्यू मिशन पर टिकी हुई थीं। अमेरिकी सेना अपने पायलट को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही थी। ठीक उसी समय चीन ने बिना किसी शोर-शराबे के ईरान के साथ बड़ा खेल कर दिया। चर्चा है कि चीन के भारी-भरकम कार्गो विमान तेहरान पहुंचे थे। ऊपर से यह केवल सामान्य लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसा दिख रहा था। लेकिन जानकारों का दावा है कि इन विमानों के भीतर खतरनाक हथियारों का जखीरा और मिसाइल पार्ट्स मौजूद थे।

यूरेनियम और हथियारों की गुप्त अदला-बदली

चीन के इस कथित मिशन के पीछे एक बहुत बड़ी रणनीतिक योजना बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार इन विमानों के जरिए ईरान को जरूरी डिफेंस इक्विपमेंट और आधुनिक मिसाइल तकनीक पहुंचाई गई। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि वापसी के दौरान ये विमान ईरान का संवेदनशील यूरेनियम अपने साथ ले गए। अगर इन दावों में जरा भी सच्चाई है, तो यह अमेरिका के न्यूक्लियर प्रोग्राम विरोधी अभियान के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।

बदल सकता है दुनिया का पावर बैलेंस

अमेरिका हमेशा से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना चाहता है। यूरेनियम ही अमेरिका का सबसे मुख्य टारगेट रहा है। यदि चीन ने वाकई इसे अपने संरक्षण में ले लिया है, तो अमेरिका के लिए इसे वापस पाना लगभग नामुमकिन होगा। यह ईरान को एक तरह की ‘न्यूक्लियर शील्ड’ प्रदान करने जैसा कदम है। इससे मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। चीन अब खुद को अमेरिका के सामने एक महाशक्ति के रूप में पेश कर रहा है।

दावे और हकीकत के बीच का सस्पेंस

फिलहाल इस पूरे मामले पर किसी भी देश की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी पक्ष ने अब तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक तौर पर पेश नहीं किए हैं। हालांकि, रक्षा गलियारों में यह एक मजबूत जियोपॉलिटिकल थ्योरी बनकर उभरी है। अगर यह मिशन हाई सीक्रेट तरीके से पहले से तय था, तो इसे अंजाम देना संभव है। आने वाले कुछ दिनों में इस दावे की सच्चाई दुनिया के सामने आ सकती है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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