ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के बीच चीन की बड़ी चाल, क्या ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले छिड़ेगा महायुद्ध?

World News: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज शनिवार को ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम को लेकर अहम शांति वार्ता शुरू हो रही है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा करके दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को भांपते हुए ईरान की सैन्य मदद शुरू कर दी है। बीजिंग कथित तौर पर तेहरान को अपना आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भेज रहा है ताकि अमेरिकी हवाई हमलों का मुकाबला किया जा सके।

चीन की खुफिया रणनीति और अमेरिकी एजेंसियों का दावा

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, चीन अगले कुछ हफ्तों के भीतर ईरान को अत्याधुनिक हथियार प्रणाली की खेप पहुंचाने की तैयारी कर चुका है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने पुष्टि की है कि चीन का यह कदम बेहद उत्तेजक है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बीजिंग ने हाल ही में दावा किया था कि उसने ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक संघर्ष विराम कराने में सक्रिय भूमिका निभाई है।

शांति वार्ता की आड़ में सैन्य ताकत बढ़ा रहा है ईरान

खुफिया आकलनों से संकेत मिलता है कि ईरान वर्तमान सीजफायर का उपयोग अपनी सैन्य शक्ति को पुनर्गठित करने के लिए कर रहा है। तेहरान अपने उन हथियार प्रणालियों को फिर से भर रहा है जो पिछले पांच हफ्तों के युद्ध के दौरान समाप्त या क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस कार्य में चीन उसका प्रमुख विदेशी साझेदार बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह एयर डिफेंस सिस्टम ईरान के पास पहुंच गया, तो भविष्य में अमेरिका के लिए कोई भी सैन्य कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन होगा।

तीसरे देशों के जरिए हथियारों की तस्करी का जाल

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन इन हथियारों को सीधे भेजने के बजाय तीसरे देशों के रास्ते ईरान पहुंचाने की योजना बना रहा है। इस गुप्त रास्ते का उद्देश्य हथियारों के असली स्रोत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरों से छिपाना है। चीन जो सिस्टम भेज रहा है, उनमें प्रमुख रूप से कंधे पर रखकर दागे जाने वाले एंटी-एय़रक्राफ्ट मिसाइल (MANPADs) शामिल हैं। ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए काल साबित हो सकती हैं।

ट्रंप का बीजिंग दौरा और चीन की दोहरी कूटनीति

दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने की शुरुआत में चीन का आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। वहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होनी तय है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि ईरान में सीजफायर को लेकर दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत हुई थी। हालांकि, एक तरफ शांति का समर्थन करना और दूसरी तरफ ईरान को घातक हथियारों की आपूर्ति करना चीन की दोहरी कूटनीति को उजागर करता है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ना निश्चित है।

चीनी दूतावास ने आरोपों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद

वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन खुफिया रिपोर्टों का कड़ा खंडन किया है। दूतावास के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि चीन ने कभी भी संघर्षरत किसी भी पक्ष को हथियार उपलब्ध नहीं कराए हैं। उन्होंने अमेरिकी आरोपों को मनगढ़ंत और सनसनी फैलाने वाला करार दिया। प्रवक्ता के अनुसार, चीन एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में हमेशा अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है। उन्होंने अमेरिका से अपील की है कि वह तनाव कम करने के लिए सकारात्मक प्रयास करे।

क्या चीनी मिसाइल ने ही गिराया था अमेरिकी F-15 फाइटर?

बीते सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया था कि ईरान ने हाल ही में अमेरिका का एक F-15 फाइटर जेट मार गिराया है। ट्रंप के अनुसार, इस हमले में कंधे से दागे जाने वाले ‘हीट-सीकिंग मिसाइल’ का इस्तेमाल हुआ था। हालांकि ईरान ने इसे अपना ‘नया’ डिफेंस सिस्टम बताया था, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक चीन से आई हो सकती है। अब नए हथियारों की खेप ईरान पहुंचने से खाड़ी क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा और गहरा गया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories