Florida News: अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन का सफल प्रक्षेपण कर दिया है। अमेरिकी समय के अनुसार शाम 6:24 बजे (भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 3:54 बजे) इस शक्तिशाली रॉकेट ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। इस ऐतिहासिक मिशन के जरिए चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा करने निकल पड़े हैं। यह मिशन न केवल चांद पर दोबारा इंसानी कदम रखने की नींव है, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचने के भारत और दुनिया के सपने को भी नया पंख दे रहा है।
चंद्रमा की परिक्रमा और 10 दिनों का साहसिक सफर
आर्टेमिस II मिशन नासा के ओरियन अंतरिक्ष यान का पहला मानव-सहित परीक्षण है। इस अभियान में चार दिग्गज अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। मिशन की कमान रीड वाइजमैन संभाल रहे हैं, जबकि विक्टर ग्लोवर पायलट की भूमिका में हैं। उनके साथ मिशन विशेषज्ञ के तौर पर क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैंसन अंतरिक्ष की गहराइयों में जा रहे हैं। ये सभी ‘इंटीग्रिटी’ नामक ओरियन यान में सवार होकर चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे। लगभग 10 दिनों की इस चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद यान सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लौटेगा।
आर्टेमिस II मिशन क्यों है पूरी दुनिया के लिए खास?
यह मिशन विज्ञान और तकनीक की कसौटी पर बेहद अहम है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने का नया विश्व रिकॉर्ड बना सकते हैं। इससे पहले यह गौरव अपोलो 13 मिशन के पास था। नासा इस दौरान कई जटिल प्रणालियों की जांच कर रहा है। इसमें आपातकालीन सुरक्षा प्रक्रियाएं, घातक रेडिएशन से बचाव और लेजर तकनीक पर आधारित आधुनिक संचार व्यवस्था शामिल है। ये सभी तकनीकें भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी इंसानी बस्ती बसाने के लिए अनिवार्य हैं।
आधी सदी बाद चांद पर वापसी का संकल्प
नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर अमित क्षत्रिय ने इस मिशन को मानवता के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि 53 साल पहले इंसान चांद से लौटा था और तब से अब तक कोई वापस नहीं गया। 50 साल के लंबे इंतजार के बाद अब हम फिर से वहां जा रहे हैं। हालांकि, इस बार यात्री चांद की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके बेहद करीब से गुजरेंगे। तकनीकी कारणों से पिछले महीने इसमें कुछ देरी जरूर हुई थी, लेकिन अब फ्लोरिडा के आसमान को चीरते हुए आर्टेमिस II ने अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।

