Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 13 फरवरी 2026 के बाद हुए पंचायतों के सृजन, पुनर्गठन और परिसीमन को सिरे से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की तय समय सीमा के भीतर चुनाव कराने के सख्त आदेश दिए हैं। अब राज्य में आगामी पंचायत चुनाव पुरानी व्यवस्था और पूर्व परिसीमन के आधार पर ही संपन्न करवाए जाएंगे।
नए परिसीमन और पुनर्गठन को हाईकोर्ट ने किया नजरअंदाज
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने पाया कि 13 फरवरी 2026 के बाद पंचायतों के पुनर्गठन का मसौदा अधिसूचित किया गया था। इस प्रक्रिया में तय नियमों और अधिनियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। अदालत ने साफ कहा कि इस नए परिसीमन को चुनाव का आधार बिल्कुल नहीं बनाया जा सकता है। आगामी पंचायत चुनावों में नए रोस्टर और चुनाव क्षेत्रों के निर्धारण में इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था के आधार पर ही संपन्न होंगे चुनाव
हाईकोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि जो पंचायतें हाल ही में नियम से बाहर जाकर विभाजित या पुनर्गठित हुई हैं, उन्हें दरकिनार किया जाए। चुनाव पुराने परिसीमन और पंचायतों की पूर्व स्थिति के आधार पर ही करवाए जाएं। हालांकि, अदालत ने एक बात पूरी तरह स्पष्ट की है। 13 फरवरी 2026 से पहले हुए परिसीमन पूरी तरह मान्य होंगे। बशर्ते, उन मामलों में हिमाचल प्रदेश चुनाव नियमों का पूरी सख्ती के साथ पालन किया गया हो।
सात अप्रैल तक रोस्टर जारी करने का अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रोस्टर फाइनल करने का अल्टीमेटम दे दिया है। सरकार को हर हाल में 7 अप्रैल 2026 तक चुनाव रोस्टर प्रकाशित करना होगा। इसके बाद चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की तय सीमा के भीतर पूरी चुनाव प्रक्रिया खत्म करनी होगी। समय की कमी और चुनाव की तात्कालिकता को देखते हुए अदालत ने परिसीमन की वैधता से जुड़े अन्य मुद्दों पर अभी अपना फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता इन मामलों के लिए भविष्य में उचित समय पर नई याचिका दायर कर सकते हैं।

