Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दृष्टिबाधित संघ का आंदोलन अब काफी उग्र हो गया है। अपनी मांगों को लेकर पिछले 902 दिनों से धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने आज जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सचिवालय से मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर की तरफ एक बड़ा मार्च निकाला। पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई।
नग्न प्रदर्शन की चेतावनी से बढ़ी सरकार की मुश्किलें
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी काफी ज्यादा भड़क गए। उन्होंने राज्य सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए एक बड़ा अल्टीमेटम दिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें तुरंत पूरी नहीं की गईं, तो वे बेहद उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने सड़कों पर नग्न प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है। लंबे समय से चल रहे इस शांतिपूर्ण आंदोलन ने अब एक आक्रामक रूप ले लिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर साधा सीधा निशाना
दृष्टिबाधित संघ के प्रमुख सदस्य राजेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोला है। राजेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को राजनीति का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री आज असम के दौरे पर हैं और वहां भी उनके हालात बिहार जैसे ही होंगे। प्रदर्शनकारी लंबे समय से सिर्फ अपने हकों की मांग कर रहे हैं।
सरकारी विभागों में बैकलॉग पदों को भरने की मुख्य मांग
इस पूरे आंदोलन की मुख्य वजह सरकारी विभागों में खाली पड़े पद हैं। दृष्टिबाधित संघ विभिन्न विभागों में अपने कोटे के बैकलॉग पदों को भरने की मांग कर रहा है। राजेश ठाकुर ने बताया कि सरकार के साथ अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इन सभी बैठकों में उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। जमीनी स्तर पर सरकार ने कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है।
सहारा पेंशन बंद होने और बजट से भारी निराशा
संघ का साफ आरोप है कि चक्का जाम करने पर ही सरकार उन्हें वार्ता के लिए बुलाती है। वार्ता के बाद उनकी सभी मांगों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सरकार ने उनकी सहारा पेंशन भी अचानक बंद कर दी है। इसके अलावा हाल ही में पेश हुए बजट में भी उनके लिए कोई ठोस प्रावधान बिल्कुल नहीं किया गया है।
मांगें पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं संघ
सरकारी विभागों में आरक्षित पद पिछले कई सालों से लगातार खाली पड़े हैं। इन पदों को न भरे जाने से दृष्टिबाधित युवाओं में भारी रोष पनप रहा है। प्रदर्शनकारियों ने एकदम स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन अब इस बढ़ते तनाव को कम करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनाने में पूरी तरह से जुट गया है।

