संजौली मस्जिद केस में नया मोड़: हाई कोर्ट ने सुनवाई टाली, क्या अब बचेगी निचली दो मंजिलें?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित संजौली मस्जिद विवाद में हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले पर होने वाली सुनवाई को अगले चार सप्ताह के लिए टाल दिया है। न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की पीठ ने यह आदेश जारी किए हैं। इससे पहले नगर निगम शिमला ने अपनी अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद की अवैध ऊपरी मंजिलों को गिराने का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

हाई कोर्ट ने सुनवाई में दिया चार हफ्ते का समय

शिमला स्थित संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण से जुड़े मामले में अब अगली सुनवाई एक महीने बाद होगी। न्यायाधीश वीरेंदर सिंह ने आगामी कानूनी प्रक्रियाओं पर विचार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। पिछली सुनवाई के दौरान नगर निगम शिमला ने स्पष्ट किया था कि मस्जिद की ऊपरी मंजिलों को ध्वस्त किया जा चुका है। कोर्ट इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि क्या आदेशों का पूरी तरह पालन हुआ है।

प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि मस्जिद की केवल निचली दो मंजिलों को ही सुरक्षित रखा गया है। ऊपरी मंजिलों का जो भी हिस्सा बिना अनुमति के बना था, उसे हटा दिया गया है। कोर्ट अब इस रिपोर्ट के तथ्यों और कानूनी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेगा। चार सप्ताह के बाद होने वाली सुनवाई में इस मामले पर कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक यथास्थिति बरकरार रहेगी।

निचली मंजिलों को गिराने पर फिलहाल रोक

हाई कोर्ट ने पहले ही एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। इसके तहत मस्जिद की निचली दो मंजिलों को गिराने के आदेश पर रोक लगा दी गई थी। इससे पहले नगर निगम शिमला और जिला अदालत ने इन दो मंजिलों को भी अवैध माना था। प्रशासन ने इन्हें ३१ दिसंबर तक गिराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन मंजिलों को तोड़ने के आदेश पर हस्तक्षेप करते हुए राहत प्रदान की थी।

कोर्ट ने साफ किया था कि मस्जिद की ऊपरी मंजिलों को हटाने में कोई ढील नहीं दी जाएगी। याचिकार्ता ने खुद भी आश्वासन दिया था कि वे अतिरिक्त निर्माण को स्वेच्छा से हटा देंगे। याचिकाकर्ता ने नगर निगम को दिए गए अपने हलफनामे के अनुसार ही कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। ऊपरी मंजिलों को तोड़ने की कार्रवाई इसी आश्वासन और कानूनी आदेशों के पालन का हिस्सा मानी जा रही है।

वक्फ बोर्ड और नगर निगम के बीच कानूनी जंग

नगर निगम शिमला ने इस निर्माण को पूरी तरह अवैध करार दिया था। निगम का कहना है कि मस्जिद कमेटी या वक्फ बोर्ड को कभी निर्माण की अनुमति नहीं मिली। इसलिए यह निर्माण अनधिकृत नहीं बल्कि सीधे तौर पर गैरकानूनी है। दूसरी ओर, वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपना पक्ष रखा है। बोर्ड के अनुसार संजौली की यह मस्जिद करीब १०० वर्ष पुरानी ऐतिहासिक इमारत है।

उल्लेखनीय है कि 30 अक्तूबर 2025 को शिमला जिला अदालत ने इस मस्जिद को गिराने का कड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने नगर निगम आयुक्त के फैसले को सही ठहराते हुए पूरी इमारत को अवैध बताया था। इसी फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में कानूनी चुनौती दी गई है। वर्तमान में निचली दो मंजिलों के भाग्य का फैसला हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिका हुआ है। यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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