टोल प्लाजा पर नकद और UPI भूल जाइए, वरना जेब होगी खाली, NHAI का नया नियम कर देगा हैरान

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सहित देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह से बंद कर दिया है। अब टोल बैरियर पर न तो कैश चलेगा और न ही यूपीआई से सामान्य भुगतान होगा। अगर कोई वाहन चालक यूपीआई से टैक्स चुकाता है, तो उसे पच्चीस प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। यह सख्त नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

टोल प्लाजा पर अब सिर्फ फास्टैग का राज

राजमार्गों पर अब लंबी कतारों से मुक्ति दिलाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। प्राधिकरण का मुख्य लक्ष्य शत-प्रतिशत फास्टैग व्यवस्था को जमीन पर उतारना है। पहले लोग बिना फास्टैग के दोगुना जुर्माना देकर निकल जाते थे। अब यूपीआई भुगतान को भी इसी जुर्माने के दायरे में ला दिया गया है। फास्टैग के बिना अब सफर करना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ने वाला है। नकद लेनदेन का युग अब राजमार्गों पर पूरी तरह खत्म हो गया है।

यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का कारण

डिजिटल इंडिया के दौर में यूपीआई को हतोत्साहित करना अजीब लग सकता है। लेकिन टोल प्लाजा पर इसके नुकसान सामने आए हैं। यूपीआई लेनदेन में अक्सर नेटवर्क या सिग्नल की बड़ी समस्या आती है। क्यूआर कोड स्कैन करने में भी काफी समय बर्बाद होता है। इस देरी के कारण टोल बैरियर के पीछे वाहनों की लंबी और थकाऊ कतारें लग जाती हैं। अक्सर वाहन चालक इसी बात पर टोल कर्मियों के साथ बहस करने लगते हैं और विवाद बढ़ता है।

फास्टैग से बिना रुके सुहाना सफर संभव

फास्टैग तकनीक ने सफर के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। जब आपके वाहन पर फास्टैग लगा होता है, तो बैरियर अपने आप खुल जाता है। आपको एक सेकंड के लिए भी रुकने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस कैशलेस व्यवस्था से प्राधिकरण को भी राजस्व की सटीक जानकारी मिलती है। भ्रष्टाचार और चोरी की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाती हैं। इसलिए सिस्टम अब चाहता है कि हर गाड़ी सिर्फ और सिर्फ फास्टैग के सहारे ही चले।

हिमाचल प्रदेश के वाहन चालकों पर सीधा असर

पहाड़ी राज्य हिमाचल में फोरलेन सड़कों का जाल तेजी से बिछ रहा है। बाहर से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को इन नियमों का पालन करना होगा। मंडी स्थित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने इसे स्पष्ट किया है। उन्होंने साफ कहा है कि नकद भुगतान का विकल्प अब उपलब्ध नहीं है। यूपीआई का इस्तेमाल करने पर पच्चीस प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान हर हाल में करना ही होगा। इसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।

हिमाचल में सक्रिय प्रमुख टोल प्लाजा की स्थिति

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के अंदर चार मुख्य फोरलेन परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इनमें कीरतपुर-मनाली, परवाणू-शिमला, मटौर-शिमला और पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी रास्तों पर यातायात को सुगम बनाने के प्रयास जारी हैं। इन मार्गों पर अभी तक कुल छह टोल प्लाजा स्थापित किए जा चुके हैं। सफर पर निकलने से पहले आपको इन प्लाजा की सक्रियता और नियमों के बारे में सटीक जानकारी होनी चाहिए। ताकि कोई परेशानी न हो।

कीरतपुर मनाली मार्ग पर पड़ने वाले बैरियर

पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय कीरतपुर-मनाली मार्ग पर चार टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इनमें से वर्तमान में बलोह और मौरा टोल प्लाजा पूरी तरह से सक्रिय कर दिए गए हैं। यहां से गुजरने वाले हर वाहन का फास्टैग स्कैन किया जा रहा है। वहीं डोहलू नाला और टकोली टोल प्लाजा अभी बंद रखे गए हैं। शिमला जाने वाले परवाणू-शिमला और मटौर-शिमला फोरलेन पर भी एक-एक प्लाजा पूरी तरह सक्रिय है। यहां भी नए नियम सख्ती से लागू हैं।

सफर से पहले फास्टैग का बैलेंस जरूर जांचें

घर से अपनी गाड़ी निकालने से पहले आपको कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। सबसे पहला और अहम काम अपने फास्टैग का बैलेंस चेक करना है। कई बार हम बिना बैलेंस देखे लंबे सफर पर निकल जाते हैं। टोल प्लाजा पर स्कैनर कार्ड को रीड नहीं कर पाता है। फिर आपको मजबूरन यूपीआई का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में आपको जुर्माने के तौर पर पच्चीस प्रतिशत अतिरिक्त राशि चुकानी होगी। यह आपकी लापरवाही का सीधा आर्थिक नुकसान है।

केवाईसी अपडेट नहीं तो फास्टैग होगा ब्लैकलिस्ट

बैलेंस के साथ-साथ एक और तकनीकी पहलू का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आपके फास्टैग खाते की केवाईसी पूरी होनी चाहिए। रिज़र्व बैंक के नियमों के अनुसार अधूरी केवाईसी वाले खातों को निष्क्रिय किया जा रहा है। अगर आपका फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो गया, तो वह किसी भी टोल पर काम नहीं करेगा। फिर आप चाहे जितना भी बहस कर लें, आपको भारी जुर्माना भरना ही पड़ेगा। समय रहते अपने बैंक या सेवा प्रदाता ऐप से अपनी केवाईसी तुरंत पूरी कर लें।

विंडस्क्रीन पर फास्टैग लगाने का सही तरीका

तकनीक तभी काम करती है जब उसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। कई वाहन चालक फास्टैग को डैशबोर्ड पर रख लेते हैं या गलत जगह चिपकाते हैं। फास्टैग चिप को हमेशा वाहन की विंडस्क्रीन के बिल्कुल बीचों-बीच लगाया जाना चाहिए। शीशे के ऊपर की तरफ इसे चिपकाने से स्कैनर इसे तुरंत रीड कर लेता है। गलत जगह लगे होने पर बूम बैरियर नहीं खुलता है। इससे पीछे आ रही गाड़ियों को रुकना पड़ता है और बेवजह भारी जाम लगता है।

सिस्टम की जवाबदेही और आम आदमी की परेशानी

सरकार फास्टैग को अनिवार्य करके एक बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था बनाना चाहती है। यह देश के विकास और राजस्व के लिए बहुत अच्छा कदम है। लेकिन सिस्टम को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कैनर हमेशा सही काम करें। कई बार फास्टैग में पैसा होने के बावजूद मशीन उसे पढ़ नहीं पाती है। ऐसी स्थिति में आम नागरिक को जुर्माने का शिकार नहीं होना चाहिए। प्राधिकरण को अपनी तकनीकी खामियों को भी दूर करने पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

राजमार्गों पर सफर का बदलता हुआ नया दौर

आने वाले समय में राजमार्गों पर सफर पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर हो जाएगा। जीपीएस आधारित टोल वसूली की तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं। इसका सीधा अर्थ है कि अब सड़कों पर आपको अपनी आदतों को बदलना होगा। नियम तोड़ने या जुगाड़ लगाने की मानसिकता अब भारी पड़ेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपने इरादे साफ कर चुका है। सुविधा और सुगमता की कीमत आपको सतर्कता और नियमों के पूर्ण पालन के रूप में चुकानी ही होगी।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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