Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने पंडोह से बगलामुखी माता मंदिर तक बने इस आधुनिक रोपवे को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है। निजीकरण की इस प्रक्रिया के साथ ही रोपवे के किराए में भारी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। अचानक हुए इस 50 प्रतिशत किराये के इजाफे ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को भी गहरे असमंजस में डाल दिया है।
निजी कंपनी को मिला रोपवे का जिम्मा
हिमाचल की धार्मिक पर्यटन नीति में एक बड़ा बदलाव देखते हुए प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण रोपवे परियोजना का संचालन अब निजी क्षेत्र को दे दिया है। पहले इसका प्रबंधन सरकारी तंत्र की देखरेख में था, जिसे अब व्यवस्था सुधार के नाम पर प्राइवेट हाथों में स्थानांतरित किया गया है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने परिचालन लागत और रखरखाव के खर्चों को आधार बनाकर यह कदम उठाया है। हालांकि, आम जनता के लिए यह कदम जेब पर भारी पड़ रहा है।
किराये में भारी बढ़ोत्तरी से भक्त परेशान
इस स्थानांतरण का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है। रोपवे के टिकट दर में सीधे 50 फीसदी की वृद्धि कर दी गई है। जो श्रद्धालु सुलभ दर्शन की उम्मीद में रोपवे का सहारा लेते थे, अब वे इस बढ़े हुए किराये को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों और टैक्सी संचालकों का मानना है कि इस फैसले से पर्यटकों की संख्या पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सुविधाओं और खर्चों का दिया जा रहा हवाला
निजी हाथों में प्रबंधन जाने के बाद तर्क दिया जा रहा है कि रोपवे की सुरक्षा और यात्री सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। इसके तकनीकी रखरखाव और स्टाफ के वेतन आदि के लिए राजस्व की आवश्यकता है। दूसरी ओर, श्रद्धालु इसे जनविरोधी कदम बता रहे हैं। मां बगलामुखी का मंदिर सिद्ध पीठों में से एक है, जहाँ साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। ऐसे में किराये की मार सीधे तौर पर आस्था के सफर को महंगा बना रही है।

