Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इन झटकों ने स्थानीय लोगों के जेहन में 121 साल पुराने उस जख्म को हरा कर दिया है, जिसने पूरे शहर को मलबे में तब्दील कर दिया था। सबसे हैरान करने वाली बात समय का वह संयोग है, जो 4 अप्रैल 1905 की उस भीषण त्रासदी की बरसी से महज 8 घंटे 34 मिनट पहले घटा है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।
इतिहास और समय का डरावना संयोग
3 अप्रैल 2026 की शाम आए इन झटकों ने लोगों को घर से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। इतिहास के पन्ने पलटें तो 4 अप्रैल 1905 की सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर कांगड़ा ने अपना सबसे बुरा दौर देखा था। तब 7.8 तीव्रता के भूकंप ने करीब 20 हजार जिंदगियां लील ली थीं। इस बार भी ठीक उसी तारीख की पूर्व संध्या पर धरती का डोलना लोगों में दहशत पैदा कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र में यह दूसरी बार महसूस किए गए झटके हैं।
सिस्मिक जोन 5 की संवेदनशीलता
भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक कांगड़ा का पूरा इलाका सिस्मिक जोन 5 में आता है। यह जोन भूकंप की दृष्टि से सबसे खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि हिमालयी बेल्ट में भूगर्भीय हलचलें लगातार जारी हैं। चूंकि भूकंप का सटीक समय बताना विज्ञान के लिए अब भी चुनौती है, इसलिए केवल सतर्कता ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। पिछले कुछ समय से सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
प्रशासनिक तैयारी और सतर्कता
बार-बार कांपती धरती को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति की निगरानी कर रही हैं। किसी भी आपात स्थिति के लिए राहत कार्यों का खाका तैयार है। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। ऊँची इमारतों और कमजोर निर्माणों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

