Himachal News: ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में भारी तनाव है। इसका सीधा असर हिमाचल के सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके कारण डामर और लाइट डीजल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। कीमतों में इस वृद्धि से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का काम ठप होने की कगार पर है। ठेकेदारों ने अब पुराने रेट पर काम करने से पूरी तरह साफ इनकार कर दिया है।
डामर और लाइट डीजल की कीमतों में लगी भयंकर आग
परियोजनाओं की शुरुआत में डामर की कीमत तैंतालीस रुपये प्रति किलो थी। अब यह कीमत बढ़कर छियासी रुपये साठ पैसे प्रति किलो तक पहुंच गई है। लाइट डीजल ऑयल की कीमतों में भी पचास प्रतिशत से अधिक का भारी इजाफा हुआ है। लाइट डीजल का इस्तेमाल सड़क निर्माण की भारी मशीनों को चलाने में होता है। डामर कच्चे तेल से निकलने वाला एक गाढ़ा पदार्थ है। भारत इसका आयात मुख्य रूप से ईरान, इराक और सऊदी अरब से करता है।
पश्चिम एशिया के तनाव ने बिगाड़ा आयात और विकास का पूरा गणित
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे राजनीतिक तनाव ने आयात चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कुवैत और सिंगापुर जैसे निर्यातक देशों से आपूर्ति में भारी बाधाएं आ रही हैं। कच्चे तेल की सप्लाई चेन टूटने से बाजार में डामर की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इसका सीधा असर ग्रामीण भारत को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर पड़ रहा है। हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो निर्माण सामग्री के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं।
ठेकेदारों ने खड़े किए हाथ, सड़क योजना पर मंडराया बड़ा खतरा
डामर की कीमतें बढ़ने से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण का काम पूरी तरह रुक सकता है। इसके अलावा चौथे चरण के प्रस्तावित कार्यों पर भी भारी संकट गहराने लगा है। बढ़ती लागत को देखकर ठेकेदारों ने काम करने में अपनी असमर्थता जता दी है। हिमाचल प्रदेश ठेकेदार संघ के अध्यक्ष सतीश विज ने सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं हुई तो ठेकेदार काम बीच में बंद कर देंगे।
सड़क निर्माण की लागत तीस प्रतिशत तक बढ़ी, मंत्री ने दिया आश्वासन
निर्माण सामग्री महंगी होने से सड़क परियोजनाओं की कुल लागत में पच्चीस से तीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सरकार को इस गंभीर समस्या से अवगत करा दिया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस पूरी स्थिति पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस गंभीर मामले पर पूरी नजर रख रही है। मुख्यमंत्री से विस्तार से चर्चा करने के बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
विभिन्न सरकारी सड़क परियोजनाओं की निर्माण लागत में आया भारी अंतर
लागत बढ़ने से सरकारी योजनाओं का बजट बुरी तरह से बिगड़ गया है। सड़क की चौड़ाई के हिसाब से प्रति किलोमीटर निर्माण लागत में भारी अंतर दर्ज किया गया है।
- तीन मीटर चौड़ी सड़कों की लागत में चार लाख रुपये का अंतर आया है।
- छह मीटर चौड़ी ग्रामीण सड़कों की निर्माण लागत आठ लाख रुपये तक बढ़ गई है।
- दस मीटर चौड़ी महत्वपूर्ण सड़कों की लागत में बारह लाख रुपये की भारी वृद्धि हुई है।
आम ग्रामीण सड़कों का निर्माण कार्य भी हुआ काफी ज्यादा महंगा
राष्ट्रीय परियोजनाओं के अलावा राज्य की सामान्य ग्रामीण सड़कों का निर्माण कार्य काफी महंगा हो गया है। इन सड़कों के निर्माण में भी प्रति किलोमीटर तीन लाख पंद्रह हजार रुपये का खर्च बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में विकास की गति को बनाए रखना अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अगर नए टेंडर जारी भी किए जाते हैं, तो ठेकेदार पुरानी दरों पर काम नहीं करेंगे। इससे प्रदेश में बुनियादी ढांचे का विकास रुक जाएगा।

