हिमाचल के खजाने पर बोझ: स्टेट गेस्ट के सत्कार में उड़ाए करोड़ों, आंकड़े देख रह जाएंगे दंग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में जनता के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है, इसकी एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार ने विशिष्ट मेहमानों यानी स्टेट गेस्ट के ठहरने और उनके घूमने-फिरने पर पानी की तरह पैसा बहाया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मेहमानों के आवास और ठहरने की व्यवस्था पर कुल 4.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इतना ही नहीं, इन मेहमानों की वीआईपी आवाजाही के लिए गाड़ियों के बेड़े पर भी 1.65 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि व्यय हुई है। यह खर्च उस समय सामने आया है जब प्रदेश की आर्थिक सेहत को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती है।

मेहमाननवाजी पर करोड़ों का सरकारी खर्च

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने अपने राजकीय अतिथियों के सत्कार में कोई कसर नहीं छोड़ी। पर्यटन और सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से यह पैसा खर्च हुआ है। इसमें से बड़ा हिस्सा उन होटलों और सर्किट हाउस के बिलों का है, जहां ये वीआईपी मेहमान रुके थे। सरकार का तर्क है कि राज्य के प्रोटोकॉल के तहत यह खर्च अनिवार्य है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कर्ज के बोझ तले दबे राज्य के लिए इतनी बड़ी राशि का बोझ उठाना सही है?

गाड़ियों के काफिले पर बहाया पैसा

सिर्फ ठहरना ही नहीं, बल्कि सफर को आरामदायक बनाने के लिए भी सरकारी खजाना खुला रहा। आंकड़ों से पता चलता है कि स्टेट गेस्ट के लिए किराए पर ली गई गाड़ियों और सरकारी वाहनों के रखरखाव पर 1.65 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें ईंधन, चालकों का वेतन और लग्जरी गाड़ियों का किराया शामिल है। आम आदमी जब टूटी सड़कों और परिवहन की कमी से जूझ रहा है, तब वीआईपी गाड़ियों पर इतना खर्च सिस्टम की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।

जनता के सवालों के घेरे में फिजूलखर्ची

ये आंकड़े केवल कागजी संख्या नहीं हैं, बल्कि यह बताते हैं कि सरकारी प्राथमिकताओं में ‘अतिथियों’ का स्थान कहां है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सरकार से पूछा जा रहा है कि जब विकास कार्यों के लिए बजट की कमी का हवाला दिया जाता है, तो इन ऐशो-आराम की चीजों के लिए बजट कहां से आता है? पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। जनता जानना चाहती है कि क्या इस खर्च को कम करने का कोई विकल्प सरकार के पास है या नहीं।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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