Himachal Pradesh News: एचपीटीडीसी के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। निगम के निदेशक मंडल की अहम बैठक में कर्मचारियों के हित में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सबसे प्रमुख फैसला सफाई कर्मचारियों और माली वर्ग की पदोन्नति को लेकर हुआ है। अब इन कर्मचारियों को निगम में आगे बढ़ने और प्रमोशन पाने का मौका मिलेगा। साल 1972 के बाद पहली बार निगम में इस तरह का कोई ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।
एचपीटीडीसी अध्यक्ष आरएस बाली की पहल
कर्मचारी संघ ने इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। संघ के महासचिव राजकुमार शर्मा ने इस पहल की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह सब एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आरएस बाली की विशेष पहल के कारण ही संभव हो पाया है। इस नए फैसले से निचले वर्ग के कर्मचारियों का मनोबल काफी तेजी से बढ़ेगा। उन्हें उनके काम के अनुसार समाज और विभाग में पूरा सम्मान मिलेगा। इसके अलावा एक और अहम बदलाव किया गया है।
यूटिलिटी वर्कर का नया नाम और वेतन मुद्दा
निगम ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को एक नई पहचान दी है। अब यूटिलिटी वर्कर के पद का नाम बदलकर मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) कर दिया गया है। इसके साथ ही जीर्णोद्धार वाली इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा भी उठा है। अध्यक्ष आरएस बाली ने सरकार के सामने वेतन का अहम मामला रखा है। कर्मचारी संघ ने इस कदम की बहुत सराहना की है। हालांकि संघ ने कुछ वित्तीय चिंताओं को भी उठाया है।
लंबित एरियर और रिक्त पदों की समस्या
लंबे समय से रुके हुए डीए का एरियर और नए वेतनमान का बकाया कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण है। वेतन मिलने में हो रही देरी से कर्मचारियों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। संघ ने सरकार से इस दिशा में तुरंत राहत देने की अपील की है। निगम के कई होटलों में प्रबंधकों के पद भी खाली पड़े हुए हैं। इन रिक्त पदों के कारण होटलों का कामकाज और व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।
होटलों को ओएनएम पर देने का विरोध
एचपीटीडीसी के कुछ होटलों को ऑप्रेशन एंड मैंटीनैंस (ओएनएम) के आधार पर निजी हाथों में देने की तैयारी चल रही है। सरकार के इस फैसले पर कर्मचारी संघ ने ऐतराज जताया है। संघ ने सरकार से इस फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। संघ के महासचिव राजकुमार शर्मा ने स्पष्ट कहा कि निगम की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना सही नहीं है। इन सभी सरकारी होटलों को केवल निगम के माध्यम से ही चलाया जाए।

