Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने शराब की बिक्री को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य की आबकारी व्यवस्था में एक अहम बदलाव किया गया है। 31 मार्च के बाद पैक होने वाली शराब की हर बोतल पर अब क्यूआर कोड अनिवार्य है। सरकार ने यह फैसला शराब की बिक्री में पारदर्शिता लाने के लिए लिया है। इसका मुख्य मकसद ग्राहकों को धोखाधड़ी और अधिक कीमत वसूली से बचाना है।
उपभोक्ताओं को क्या और कैसे मिलेगा फायदा?
नई आबकारी नीति के लागू होने से ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब आप अपने स्मार्टफोन से बोतल पर लगे क्यूआर कोड को आसानी से स्कैन कर सकते हैं। इसे स्कैन करते ही आपको ये जरूरी जानकारियां तुरंत मिल जाएंगी:
- सही कीमत: शराब की बोतल का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP)।
- उत्पाद का विवरण: शराब बनने की तारीख, बैच नंबर और कंपनी का नाम।
- वैधता: शराब के इस्तेमाल की सुरक्षित अवधि और कंपनी के लाइसेंस का विवरण।
ओवरचार्जिंग और मिलावट पर लगेगी लगाम
पहले शराब की बोतल के लेबल पर ही कीमतें छपी होती थीं। इससे अक्सर छेड़छाड़ की शिकायतें विभाग को मिलती थीं। दुकानदार ग्राहकों से तय दाम से ज्यादा पैसे वसूलते थे। अब क्यूआर कोड स्कैन करने पर जो कीमत मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगी, वही अंतिम मानी जाएगी। इस डिजिटल व्यवस्था से शराब की हर बोतल की ट्रैकिंग बहुत आसान हो जाएगी। इससे अवैध और नकली शराब की तुरंत पहचान करना भी सरल हो जाएगा। अगर कोई ठेकेदार ज्यादा पैसे मांगता है, तो आप तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। डिजिटल सबूत होने से आबकारी विभाग तुरंत सख्त कार्रवाई कर सकेगा।
पुराने स्टॉक और कंपनियों के लिए क्या हैं नियम?
नए नियमों के तहत 31 मार्च से पहले का पुराना स्टॉक ही बिना क्यूआर कोड के बिकेगा। प्रशासन इस पुराने स्टॉक को धीरे-धीरे बाजार से पूरी तरह हटा देगा। 31 मार्च के बाद बनी शराब को बिना क्यूआर कोड के बेचना अब गैरकानूनी माना जाएगा। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. राजीव डोगरा ने अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उत्पादक कंपनियों को दाम बदलने पर बार-बार नए लेबल नहीं छापने पड़ेंगे। कंपनियां अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही नई कीमतें सीधे अपडेट कर सकेंगी। इस नई और आधुनिक प्रक्रिया से शराब निर्माता कंपनियों का काफी खर्च बचेगा।

