खेतों में पसीना बहाने वाले पिता का बेटा बना पद्मश्री का हकदार! जानिए डॉ. प्रेम लाल गौतम की प्रेरणादायक कहानी

Himachal News: कृषि क्षेत्र में अपने अतुलनीय योगदान के लिए प्रख्यात विज्ञानी डॉ. प्रेम लाल गौतम को पद्मश्री सम्मान के लिए नामित किया गया है। उन्होंने प्रयोगशाला के शोध को खेतों तक पहुंचाया है। किसानों के अधिकारों की रक्षा और जैव विविधता संरक्षण में उनका कार्य बेहद शानदार रहा है। वर्तमान में वह बिहार के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। मूल रूप से वह हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले हैं।

किसानों को दीं 12 उन्नत फसल किस्में

डॉ. गौतम ने कृषि जगत में कई बड़े बदलाव किए हैं। उन्होंने गेहूं, सोयाबीन और अमरंथ सहित 12 उन्नत किस्मों का विकास किया है। उनकी गेहूं किस्म यूपी-262 पूर्वी भारत में बहुत लोकप्रिय हुई। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए यूपी-2003 और यूपी-368 किस्में तैयार कीं। साल 2008 में बासमती चावल के मानकों को फिर से निर्धारित करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। गेहूं के तना रतुआ रोग के वैश्विक खतरे से निपटने में भी उन्होंने देश का नेतृत्व किया।

कृषि कानूनों और नीतियों में अहम योगदान

डॉ. गौतम ने देश की कृषि नीतियों को मजबूत बनाने का काम किया है। उन्होंने पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम-2001 का मसौदा तैयार किया। जैव विविधता अधिनियम-2002 को लागू करने में भी उनका बड़ा हाथ रहा। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय जीन बैंक का संचालन शुरू हुआ। ग्लोबल क्रॉप डायवर्सिटी ट्रस्ट के सदस्य के रूप में उन्होंने किसानों को उनके अधिकार दिलवाए। उन्होंने छह संगठनों के तहत 12 प्रमुख संस्थानों का सफल नेतृत्व किया है।

पंतनगर से शुरू किया शानदार सफर

उन्होंने 1974 में पंतनगर विश्वविद्यालय से सहायक प्राध्यापक के रूप में अपना करियर शुरू किया। वह 2003 में इसी विश्वविद्यालय के कुलपति बने। उन्होंने नौणी विश्वविद्यालय में डीन का पद भी संभाला। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में उप महानिदेशक के पद पर शानदार काम किया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में वह दो साल तक अध्यक्ष रहे। साल 2012 में सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद भी वह शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सक्रिय रहे।

गरीबी में बीता बचपन, परिवार का मिला साथ

डॉ. गौतम का जन्म 12 दिसंबर 1947 को बिलासपुर के कंडयाना गांव में हुआ था। उनके पिता खजाना राम एक साधारण किसान थे। गरीबी के बावजूद उनके माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी। डॉ. गौतम ने नौणी विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के पूसा संस्थान से एमएससी और पीएचडी पूरी की। वह अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय अपने बड़े भाई और अपनी पत्नी कमला को देते हैं।

हरिमन सेब को दिलाई बड़ी पहचान

किसान हरिमन शर्मा को पिछले साल सेब की नई किस्म के लिए पद्मश्री मिला था। डॉ. गौतम ने हरिमन-99 सेब किस्म के पंजीकरण में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सेब की यह किस्म सीधे किसान के नाम पर पंजीकृत हो। अपने लंबे करियर में डॉ. गौतम ने डॉ. एमएस स्वामीनाथन और डॉ. नार्मन बोरलाग जैसे महान विज्ञानियों के साथ काम किया। कृषि क्षेत्र में उनकी इस मेहनत को हमेशा याद रखा जाएगा।

देश के कई बड़े सम्मान किए अपने नाम

कृषि क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए डॉ. गौतम को पहले भी कई बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें प्रतिष्ठित डॉ. हरभजन सिंह स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। भारत सरकार ने उन्हें इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी पुरस्कार से भी नवाजा है। अब पद्मश्री के लिए उनका नामांकन हिमाचल प्रदेश और पूरे देश के लिए एक बहुत ही बड़ी गर्व की बात है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories