National News: सर्दियों की विदाई के साथ अब सूरज की तपिश बढ़ने लगी है। आसमान से बरसती गर्मी हमें परेशान तो करती है, लेकिन यही सूरज पृथ्वी पर जीवन का आधार है। करीब 4.5 अरब साल पुराना यह तारा हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक दहकता हुआ गोला है। वैज्ञानिकों के लिए सूर्य आज भी रहस्यों का एक ऐसा पिटारा है, जिसकी परतें खुलनी अभी बाकी हैं। इसके गुरुत्वाकर्षण ने ही पूरे सौरमंडल को एक धागे में पिरो रखा है।
कितना विशाल है हमारा सूर्य?
सूर्य सौरमंडल का सबसे बड़ा खगोलीय पिंड है। इसका व्यास करीब 14 लाख किलोमीटर है। यह इतना विशाल है कि इसमें 13 लाख पृथ्वी समा सकती हैं। पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। नासा के अनुसार यह एक ‘पीला बौना’ तारा है। यह लगातार अंतरिक्ष में ऊर्जा और प्रकाश भेजता रहता है। इसके बिना पृथ्वी पर न तो रोशनी संभव होती और न ही जीवन का अस्तित्व होता।
कोर में 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस की भयंकर गर्मी
सूर्य का सबसे गर्म हिस्सा इसका केंद्र यानी ‘कोर’ है। यहां का तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा होता है। जिस सतह को हम देखते हैं, उसे ‘फोटोस्फीयर’ कहते हैं। फोटोस्फीयर का तापमान करीब 5,500 डिग्री सेल्सियस रहता है। यहां से ही सूर्य की ज्यादातर रोशनी बाहर निकलती है। सूर्य की बाहरी परत को ‘कोरोना’ कहा जाता है। कोरोना का तापमान सतह से भी ज्यादा 20 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
अंतरिक्ष में 4.5 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार
सूर्य स्थिर नहीं है, बल्कि यह मिल्की वे गैलेक्सी का चक्कर लगा रहा है। यह 4.5 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से गैलेक्सी के केंद्र की परिक्रमा करता है। सूर्य को एक चक्कर पूरा करने में 230 मिलियन साल लगते हैं। यह अपनी धुरी पर भी घूमता है। सूर्य ठोस नहीं है, इसलिए इसके अलग-अलग हिस्से अलग-अलग रफ्तार से घूमते हैं। इसके ध्रुवों को एक चक्कर लगाने में 36 दिन का समय लगता है।
सैटेलाइट और जीपीएस को जाम कर सकता है सूरज
सूर्य हर 11 साल में एक ‘सोलर साइकिल’ से गुजरता है। इस दौरान सौर गतिविधियां बहुत बढ़ जाती हैं। इससे निकलने वाली सौर लहरें पृथ्वी के वातावरण को प्रभावित करती हैं। ये लहरें सैटेलाइट, जीपीएस और पावर ग्रिड को नुकसान पहुंचा सकती हैं। स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर इन गतिविधियों पर हमेशा नजर रखता है। सूर्य की रोशनी ही पृथ्वी को गर्म रखती है और पेड़-पौधों को भोजन बनाने में मदद करती है।

