Antarctica News: दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप अंटार्कटिका की बर्फीली वादियों में एक ऐसा नजारा दिखता है जिसे देख रूह कांप जाए। यहां टेलर ग्लेशियर से लाल रंग का एक झरना निकलता है, जिसे दुनिया ‘ब्लड फॉल्स’ के नाम से जानती है। सफेद बर्फ के बीच से निकलता यह गहरा लाल पानी ऐसा लगता है मानो कोई जख्मी ग्लेशियर खून बहा रहा हो। दशकों तक इसे एक अलौकिक रहस्य माना गया, लेकिन अब अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और वैज्ञानिकों ने इस ‘खूनी झरने’ के पीछे छिपे असली विज्ञान को पूरी दुनिया के सामने रख दिया है।
बर्फीली घाटियों में क्यों नहीं जमती बर्फ?
नासा के अनुसार अंटार्कटिका की शुष्क घाटियां (Dry Valleys) पृथ्वी के सबसे अनोखे हिस्सों में से एक हैं। यह रॉस सागर और पूर्वी अंटार्कटिक हिम चादर के बीच स्थित हैं। यहां तापमान शून्य से बहुत नीचे रहता है, फिर भी ये जमीन बर्फ से मुक्त रहती है। इसका कारण यहाँ चलने वाली ‘कैटाबेटिक’ हवाएं हैं। ये शुष्क और ठंडी हवाएं इतनी शक्तिशाली होती हैं कि वे नमी को सोख लेती हैं और बर्फ को टिकने नहीं देतीं। इन्हीं घाटियों के बीच मौजूद लेक बोनी में यह रहस्यमयी लाल झरना गिरता है।
लाखों साल पुराने नमक और लोहे का है ये कमाल
ब्लड फॉल्स का रहस्य समझने के लिए वैज्ञानिक 1960 के दशक से माथापच्ची कर रहे थे। साल 2003 में ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी की टीम ने इस पर से पर्दा हटाया। असल में लाखों साल पहले यह पूरा इलाका समुद्र का हिस्सा था। जब समुद्र पीछे हटा, तो वहां एक खारी झील बन गई जिसमें भारी मात्रा में लोहा जमा था। बाद में ग्लेशियर ने इस झील को पूरी तरह ढंक लिया। अब जब यह लौह युक्त नमक वाला पानी ग्लेशियर के नीचे से रिसकर बाहर आता है और हवा के संपर्क में आता है, तो इसमें जंग लगने की प्रक्रिया (ऑक्सीडेशन) शुरू हो जाती है। इसी कारण पानी का रंग गहरा लाल हो जाता है।
मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश में मददगार
यह झरना सिर्फ एक प्राकृतिक अजूबा नहीं है, बल्कि विज्ञान के लिए एक बड़ी खिड़की भी है। वैज्ञानिक इन घाटियों का अध्ययन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यहाँ की परिस्थितियां मंगल ग्रह जैसी हैं।
- यहाँ बिना ऑक्सीजन और रोशनी के भी सूक्ष्मजीव जीवित हैं।
- यह झरना पृथ्वी के प्राचीन जलवायु परिवर्तन को समझने में मदद करता है।
- यहाँ मीठे और खारे पानी की झीलों का अनूठा संगम मिलता है।
- नासा के टेरा सैटेलाइट ने अंतरिक्ष से भी इस अद्भुत दृश्य को कैद किया है।
भविष्य की खोज और ड्रिलिंग प्रोजेक्ट
वैज्ञानिक अब इस ग्लेशियर के और गहरे हिस्सों तक पहुंचने की योजना बना रहे हैं। नासा का मानना है कि ग्लेशियर के अंदर मौजूद प्राचीन झीलों में ड्रिलिंग करने से धरती के इतिहास के बारे में कई नई जानकारियां मिल सकती हैं। यह जगह हमें बताती है कि कैसे चरम स्थितियों में भी जीवन अपना रास्ता खोज लेता है। ब्लड फॉल्स आज भी दुनिया के शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।


