Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार कांगड़ा जिले के गग्गल हवाई अड्डे को नया रूप देने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में इस बड़े प्रोजेक्ट का पूरा प्लान साझा किया है। राज्य सरकार इस साल के अंत तक जमीन अधिग्रहण का काम हर हाल में पूरा कर लेगी। सरकार अब तक प्रभावित परिवारों को 1960 करोड़ रुपये का भारी मुआवजा बांट चुकी है। इस पूरे महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में लोगों को करीब 3500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना है।
जमीन अधिग्रहण तेज, मिलेगा 1500 करोड़ का बकाया मुआवजा
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि नियम के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है। सरकार प्रभावित लोगों को उनका जायज हक दे रही है। अभी करीब 1500 करोड़ रुपये की बकाया राशि और बांटी जानी है। सरकार एक तय समय सीमा के भीतर इस काम को पूरा करने की कोशिश कर रही है। इससे विस्थापित होने वाले स्थानीय लोगों को बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
अब कांगड़ा में उतरेंगे बड़े विमान, 3110 मीटर होगा लंबा रनवे
फिलहाल गग्गल हवाई अड्डे का रनवे सिर्फ 1370 मीटर लंबा है। विस्तार के बाद इसकी लंबाई को बढ़ाकर 3110 मीटर कर दिया जाएगा। रनवे बड़ा होने से यहां देश-विदेश के बड़े विमान आसानी से उतर सकेंगे। इससे कांगड़ा घाटी में पर्यटकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ेगी। राज्य सरकार ने कांगड़ा को पहले ही हिमाचल की पर्यटन राजधानी घोषित कर दिया है। गग्गल हवाई अड्डे का यह विस्तार इस दिशा में एक ऐतिहासिक और मजबूत कदम साबित होगा।
केंद्र ने नहीं की मदद तो पीपीपी मोड से बनेगा एयरपोर्ट
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में साफ किया कि सरकार के पास सारे विकल्प खुले हैं। अगर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया काम नहीं करती है, तो प्रोजेक्ट रुकेगा नहीं। राज्य सरकार पीपीपी मॉडल के जरिए भी इस हवाई अड्डे को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री इस जरूरी मुद्दे पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय उड्डयन मंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर जरूरी अनुमति दे तो प्रदेश सरकार बल्क एयरपोर्ट भी बना सकती है।
हर जिले में बनेंगे हेलीपोर्ट, पहाड़ी सफर होगा बेहद आसान
हिमाचल सरकार प्रदेश में हवाई सेवाओं का एक मजबूत जाल बिछा रही है। राज्य के हर जिले में आधुनिक हेलीपोर्ट बनाने का काम काफी तेज हो गया है। पालमपुर, चंबा और हमीरपुर में जून तक हेलीपोर्ट पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। इसके बाद अगले चरण में ऊना, सिरमौर और सोलन का नंबर आएगा। सरकार ने शिमला-दिल्ली उड़ान जारी रखने के लिए 110 करोड़ रुपये की मदद दी है। दिल्ली-शिमला-अमृतसर उड़ान भी जल्द शुरू होगी, लेकिन अभी पहाड़ी इलाकों के लिए पायलटों की थोड़ी कमी है।

