Himachal News: दलबदल की राजनीति पर लगाम कसने के लिए हिमाचल प्रदेश की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में एक ऐसा बिल पास कराया है जिससे विपक्ष बेचैन हो गया है। नए कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए विधायकों की पेंशन अब पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह बिल विधानसभा में भारी हंगामे और कड़े विरोध के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया है।
क्या है यह नया पेंशन संशोधन बिल?
यह नया कानून 1971 के भत्ते और पेंशन अधिनियम में अहम संशोधन करता है। इसके अनुसार दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित कोई भी विधायक अब पेंशन का हकदार नहीं होगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ किया है कि यह नियम भविष्य में होने वाले दलबदल पर लागू होगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य विधायकों को दल बदलने से रोकना और लोकतंत्र की रक्षा करना है।
विपक्ष ने बताया बदले की राजनीति
सदन में इस नए बिल का भारी विरोध देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे सरकार की बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी अदालत में टिक नहीं पाएगा। भाजपा के अन्य विधायकों ने भी इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उनका मानना था कि इस तरह का कड़ा बिल सदन की गरिमा के बिल्कुल खिलाफ है।
सरकार का पलटवार और लोकतंत्र की दुहाई
विपक्ष के तीखे हमलों का सरकार ने भी करारा जवाब दिया। संसदीय कार्य मंत्री ने इसे दल-बदल रोकने के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार ऐसी राजनीतिक खरीद-फरोख्त देखने को मिली है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र को बिकने से बचाने के लिए यह सख्त कदम जरूरी था। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस बिल को दलबदल विरोधी ढांचे को मजबूत करने वाला बताया।

