Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है। सोलन की चर्चित चेस्टर हिल आवास परियोजना में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने अब इस पूरे मामले में सख्त रुख अपना लिया है। भाजपा ने उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से इस प्रोजेक्ट की गहन जांच कराने की मांग की है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता पहले ही इन आरोपों को निराधार बता चुके हैं। इसके बावजूद राज्य में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
माकपा ने लगाए भूमि कानून उल्लंघन के गंभीर आरोप
वामपंथी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इस मामले को सबसे पहले उठाया था। माकपा का दावा है कि इस परियोजना में राज्य के कड़े भूमि कानूनों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हुआ है। पार्टी ने राज्य में सक्रिय कथित भूमि माफिया और बेनामी जमीन सौदों की विशेष जांच दल से जांच की मांग की है। माकपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि मुख्य सचिव को पद से हटाए बिना इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बिल्कुल भी संभव नहीं है।
धारा 118 का उल्लंघन और गैर-हिमाचलियों को जमीन
हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीदने के नियम बेहद सख्त हैं। राज्य के काश्तकारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 यहां लागू है। यह धारा गैर-हिमाचली लोगों को बिना पूर्व अनुमति के जमीन खरीदने से रोकती है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में इसी महत्वपूर्ण धारा की धज्जियां उड़ाई गई हैं। नेताओं का मानना है कि सत्ता के संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं है।
भाजपा ने प्रदेश सरकार की चुप्पी पर दागे सवाल
राज्य भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अधिकारी खुद अपने बचाव में आगे आ रहे हैं। शर्मा ने सवाल उठाया कि ऐसे गंभीर मामलों में राज्य सरकार आखिर चुप क्यों है। यह चुप्पी दर्शाती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का काम बहुत ही सुनियोजित और योजनाबद्ध तरीके से लगातार कर रही है।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पेश की थी सफाई
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने इकतीस मार्च को एक प्रेस वार्ता की थी। उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। गुप्ता ने बचाव में पूर्व मुख्य सचिवों के कार्यकाल की अनियमितताओं की ओर भी इशारा किया था। उन्होंने दावा किया कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। हालांकि उनके इस बयान के बाद विपक्ष का गुस्सा शांत होने के बजाय और भी ज्यादा बुरी तरह से भड़क गया है।
भ्रष्ट अधिकारियों को मिल रहे हैं आकर्षक पद
रणधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है। सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को अपना पूरा संरक्षण दे रही है। उन्हें कार्यकाल विस्तार और आकर्षक पदों की पेशकश भी लगातार की जा रही है। भाजपा का मानना है कि इस तरह की राजनीति से राज्य का विकास प्रभावित हो रहा है। आम जनता भी अब सरकार की इन गलत नीतियों को अच्छी तरह से समझने लगी है।
वाहनों पर प्रवेश शुल्क लगाने का भी हुआ कड़ा विरोध
चेस्टर हिल मामले के साथ भाजपा ने एक और बड़ा मुद्दा उठाया है। प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने यात्री वाहनों पर लगने वाले प्रवेश शुल्क की बहुत कड़ी आलोचना की। हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने वाले पांच सीट वाले वाहनों पर सौ रुपये का शुल्क लगा है। शर्मा ने कहा कि सरकार ने सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर डाका डाला है। इस नए कर के कारण हाल ही में राज्य के कई स्थानों पर भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
पारदर्शी जांच से ही बाहर आ पाएगा पूरा सच
हिमाचल प्रदेश की राजनीति अब पूरी तरह से इस प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द घूम रही है। विपक्षी दलों का दबाव राज्य सरकार पर लगातार बढ़ता जा रहा है। हाईकोर्ट के जज से जांच की मांग ने इस मामले को और भी ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। आम जनता भी इस विवाद का सच जल्द से जल्द जानना चाहती है। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच अपना अगला क्या महत्वपूर्ण कदम उठाती है।

