Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ के जरिए प्रशासनिक ढांचे को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने साफ कहा कि अब सरकारी कामकाज में सिर्फ औपचारिकता से काम नहीं चलेगा। बदलते दौर की चुनौतियों और बढ़ती जन आकांक्षाओं के बीच इसे पूरी तरह अपडेट और जवाबदेह बनाना होगा।
अच्छी शासन की नींव है सेवाओं में सुधार
पीएम मोदीने सरकारी सेवाओं में सुधार को बेहतर शासन की नींव बताया। उनका मानना है कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक पटल पर मजबूती से उभर रहा है, सार्वजनिक सेवाओं का स्वरूप आधुनिक और जन-केंद्रित होना चाहिए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना है। साथ ही, उन्हें ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ना भी जरूरी है।
‘नागरिक देवो भव’: सेवा का नया दृष्टिकोण
प्रधानमंत्रीने अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘नागरिक देवो भव’ का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को सर्वोच्च मानकर सेवा करना सरकार का प्राथमिक धर्म है। जब सरकारी तंत्र इस भावना से काम करेगा, तभी अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
विकसित भारत @2047 का विजनरी रोडमैप
पीएम मोदीने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है। इस विशाल लक्ष्य के लिए चार स्तंभ जरूरी हैं:
तेज आर्थिक विकास
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
नई तकनीक कासमावेश
कुशल और दक्ष मानव संसाधन
उन्होंनेसाफ किया कि इन लक्ष्यों को पाने में सरकारी संस्थानों और कर्मचारियों की भूमिका सबसे निर्णायक होगी।
व्यक्तिगत बदलाव पर जोर, बढ़ती उम्मीदें
प्रधानमंत्रीने अधिकारियों को सलाह दी कि कोई भी नीतिगत फैसला लेने से पहले वे अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी को तौलें। उन्होंने कहा कि संस्थानों में बड़ा परिवर्तन तभी आता है, जब व्यक्ति अपने कार्य व्यवहार में सुधार करता है। आज के भारत को ‘उम्मीदों का दौर’ बताते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों के सपने अब बड़े हैं। सरकार की सफलता लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और ‘ईज ऑफ लिविंग’ में है।


