Himachal News: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने भारत के छोटे उद्यमियों और युवाओं की तकदीर बदल दी है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने इस योजना के 11 वर्ष पूरे होने पर बड़ी बात कही है। उन्होंने बताया कि इस योजना के कारण देश का युवा अब ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहा है। बिना गारंटी के मिलने वाले ऋण ने करोड़ों लोगों के सपनों को नई उड़ान दी है। आत्मनिर्भर भारत की नींव अब जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत हो चुकी है।
58 करोड़ लोन और 40 लाख करोड़ की बड़ी मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस योजना ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पिछले 11 वर्षों में 58 करोड़ से अधिक मुद्रा ऋण वितरित किए गए हैं। इसके तहत कुल 40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे उद्यमियों तक पहुंची है। अनुराग ठाकुर ने इसे आर्थिक सशक्तिकरण की एक स्वर्णिम गाथा करार दिया। इस वित्तीय सहायता ने समाज के वंचित वर्गों और छोटे व्यापारियों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महिला सशक्तिकरण में मुद्रा योजना का सबसे बड़ा हाथ
इस योजना के लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे शानदार रही है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 67 प्रतिशत ऋण सीधे महिला उद्यमियों को दिए गए हैं। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ है। इसके अतिरिक्त, 12.15 करोड़ से अधिक खाते उन नए उद्यमियों के हैं, जिन्होंने पहली बार अपना व्यवसाय शुरू किया है। सरकार ने इन नए स्टार्टअप्स को 12 लाख करोड़ रुपये की बड़ी प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।
हाशिए पर खड़े समुदायों को मिला आर्थिक सहारा
मुद्रा योजना ने पारंपरिक बैंकिंग बाधाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। योजना के लगभग 51 प्रतिशत खाते अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों के पास हैं। इन वर्गों को कुल ऋण का 49 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही, 6.15 करोड़ अल्पसंख्यक लाभार्थियों को भी 3.50 लाख करोड़ रुपये की मदद मिली है। यह समावेशी विकास की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को पूरी तरह स्पष्ट करता है।
बैंकिंग सिस्टम से दूर लोगों तक पहुंची सीधे मदद
अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह योजना ‘जॉब मल्टिप्लायर’ के रूप में काम कर रही है। इससे उन लोगों को ऋण मिला, जिनकी पहले बैंकों तक पहुंच ही नहीं थी। युवा अब केवल अपने लिए रोजगार नहीं खोज रहे, बल्कि दूसरों को भी काम दे रहे हैं। अल्प समय में आए इस बदलाव ने देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति दी है। यह नए भारत की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।

