West Bengal News: पश्चिम बंगाल में साल 2026 का विधानसभा चुनाव एक बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। इस बार कुल 294 सीटों पर घमासान होगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला है। चुनाव आयोग ने चुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। वहीं, 4 मई 2026 को चुनाव के नतीजे आएंगे। चुनाव में 100 फीसदी वेबकास्टिंग और भारी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा का पूरा गणित
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को कम से कम 148 सीटों की जरूरत होगी।
- सामान्य (General) सीटें: 210
- अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 68
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 16
बंगाल चुनाव 2026 का अहम कार्यक्रम
- चुनाव कार्यक्रम की घोषणा: 15 मार्च 2026
- पहला चरण (152 सीटें): वोटिंग 23 अप्रैल 2026
- दूसरा चरण (142 सीटें): वोटिंग 29 अप्रैल 2026
- नतीजों की तारीख: 4 मई 2026
मतदाताओं और सुरक्षा की पूरी तैयारी
बंगाल चुनाव में इस बार करीब 7.08 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं।
- चुनाव में 2500 कंपनियों की भारी तैनाती होगी।
- 480 कंपनियां बंगाल में पहले ही पहुंच चुकी हैं।
- सभी मतदान केंद्रों की 100 फीसदी लाइव वेबकास्टिंग होगी।
- फ्लाइंग स्क्वायड और स्टैटिक सर्विलांस टीम 24 घंटे नजर रखेंगी।
दलित वोटर्स और उत्तर बंगाल की भूमिका
बंगाल की 127 विधानसभा सीटों पर अनुसूचित जाति (SC) की आबादी 25 प्रतिशत से ज्यादा है। मतुआ और नमशूद्र समुदाय चुनाव के नतीजे तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा उत्तर बंगाल के 8 जिलों की 54 सीटें भी काफी निर्णायक साबित होंगी। यहां गोरखा पहचान, चाय बागान श्रमिक और राजबंशी समुदाय के मुद्दे काफी हावी रहेंगे।
TMC और BJP की सीधी टक्कर
टीएमसी ‘बंगाल बचाओ, ममता बचाओ’ के नारे के साथ मैदान में है। ममता बनर्जी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय नेता की छवि पर भरोसा कर रही हैं। वहीं, भाजपा ‘सोनार बांग्ला’ और ‘परिवर्तन’ का नारा दे रही है। भाजपा राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार और सीएए (CAA) के मुद्दे पर वोट मांग रही है। कांग्रेस और वाम दल इस बार अलग-अलग चुनाव लड़कर अपनी जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटे हैं।

