Himachal News: हिमाचल प्रदेश में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर बड़ा अपडेट आया है। राज्य के शहरी विकास विभाग ने अध्यक्ष पदों के लिए नया आरक्षण रोस्टर आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। सरकार की इस नई अधिसूचना से प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। यह रोस्टर हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत तैयार हुआ है। अब प्रदेश की विभिन्न नगर परिषदों और पंचायतों में महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए खास सीटें आरक्षित कर दी गई हैं।
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटें
शहरी विकास विभाग की सूची के अनुसार अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए कई अहम सीटें आरक्षित हुई हैं। ऊना के दौलतपुर, चंबा, कुल्लू के बंजार, बिलासपुर और मंडी के सुंदरनगर में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति की महिलाओं को मिला है। मेहतपुर बसदेहरा, नगरोटा बगवां, घुमारवीं, रोहड़ू और चिरगांव की सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग में कांगड़ा जिले की शाहपुर नगर पंचायत को रखा गया है। आरक्षण से निकाय चुनाव अब काफी दिलचस्प मोड़ पर आ गए हैं।
महिलाओं के लिए आरक्षित हुई ये प्रमुख सीटें
सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई सीटें महिला सामान्य वर्ग को दी हैं। कुल्लू की निरमंड और कुल्लू नगर परिषद इसमें प्रमुख हैं। सोलन में अर्की और कंडाघाट सीटें महिलाओं को मिली हैं। कांगड़ा में ज्वालामुखी और नूरपुर की कमान महिलाएं संभालेंगी। ऊना से संतोषगढ़, अंब और गगरेट आरक्षित हुई हैं। शिमला से ठियोग, चौपाल, जुब्बल और नारकंडा भी महिलाओं को मिली हैं। सिरमौर के नाहन और पांवटा साहिब भी इसी सूची में शामिल किए गए हैं।
अनारक्षित श्रेणी में शामिल हुए ये प्रमुख शहर
रोस्टर के मुताबिक कई नगर परिषदों और पंचायतों को अनारक्षित श्रेणी में रखा गया है। बिलासपुर से तलाई और श्री नैना देवी इस सूची में हैं। चंबा की चुवाड़ी, हमीरपुर की भोटा और कांगड़ा की देहरा व कांगड़ा परिषद अनारक्षित हैं। मंडी में जोगिंदरनगर, रिवालसर, नेरचौक और करसोग सीट पर सामान्य चुनाव होगा। शिमला की रामपुर, नेरवा और कोटखाई सीटें भी अनारक्षित हैं। कुल्लू की मनाली और सोलन की नालागढ़ व परवाणू सीटों पर कोई आरक्षण नहीं है।
चुनाव में दिखेगा सामाजिक संतुलन का नया असर
सरकार के इस नए आरक्षण रोस्टर का मुख्य उद्देश्य आगामी निकाय चुनावों में सामाजिक संतुलन स्थापित करना है। अध्यक्ष पदों पर महिलाओं की सीधी भागीदारी बढ़ने से प्रदेश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव आएगा। इस फैसले से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को विकास में नेतृत्व करने का सीधा मौका मिलेगा। राज्य चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन अब इसी नई अधिसूचना के आधार पर आगे की सभी चुनावी तैयारियों को बहुत तेजी से अपना अंतिम रूप प्रदान करेंगे।

