हिमाचल की आधी आबादी नहीं लड़ सकती कोई चुनाव, चौंकाने वाली रिपोर्ट में हुआ बहुत बड़ा खुलासा

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बहुत चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। राज्य की लगभग आधी आबादी कभी भी कोई चुनाव नहीं लड़ सकती है। इस खुलासे ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश की कुल आबादी करीब पचहत्तर लाख है। इनमें से चालीस लाख से अधिक लोग चुनाव लड़ने के कानूनी अधिकार से पूरी तरह बाहर हैं। यह बड़ी आबादी अब केवल अपना वोट डालने तक ही सीमित होकर रह गई है।

वन भूमि अतिक्रमण बना सबसे बड़ा मुख्य कारण

हिमाचल प्रदेश में चुनाव न लड़ पाने का सबसे बड़ा कारण वन भूमि अतिक्रमण है। राज्य में लगभग एक लाख अड़सठ हजार परिवारों ने वन भूमि पर कब्जा किया हुआ है। अगर एक परिवार में औसतन छह सदस्य माने जाएं, तो करीब दस लाख लोग सीधे अयोग्य हो जाते हैं। पंचायती राज कानून के अनुसार अतिक्रमण करने वाला कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता है। यह नियम लाखों ग्रामीणों को राजनीतिक प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर कर देता है।

पलायन और बाहरी लोगों की बढ़ती भारी संख्या

राज्य में रोजगार की कमी के कारण भारी पलायन हो रहा है। लगभग नौ से चौदह लाख हिमाचली लोग दूसरे राज्यों या विदेशों में रहते हैं। यह लोग चुनाव प्रक्रिया से बहुत दूर हो गए हैं। इसके अलावा आठ से बारह लाख बाहरी लोग हिमाचल में काम कर रहे हैं। इन प्रवासी मजदूरों को स्थानीय पंचायत चुनाव लड़ने का अधिकार बिल्कुल नहीं है। यह आंकड़ा चुनाव से बाहर रहने वालों की कुल संख्या को काफी तेजी से बढ़ा देता है।

अन्य कानूनी अयोग्यताएं और कड़वी जमीनी सच्चाई

सरकारी नौकरी और अन्य कानूनी अयोग्यताएं भी लाखों लोगों को चुनाव लड़ने से रोकती हैं। राज्य में दो से तीन लाख सरकारी कर्मचारी लाभ के पद के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इसके अलावा हजारों लोग गंभीर आपराधिक मामलों और दिवालियापन के कारण अयोग्य हैं। इन सभी आंकड़ों को मिलाकर लगभग बयालीस लाख लोग सिस्टम से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं। यह स्थिति साफ करती है कि सही जन प्रतिनिधि चुनने के विकल्प हमारे पास बहुत सीमित हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories