Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। इसके अलावा पुनर्नियुक्ति या दोबारा अनुबंध पर रखने के सभी प्रस्ताव पूरी तरह खारिज माने जाएंगे। सरकार के इस बड़े फैसले को वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बहुत अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को जारी किए सख्त निर्देश
इस कड़े फैसले के संबंध में मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में साफ कहा गया है कि अब कोई भी विभाग किसी अधिकारी या कर्मचारी की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि गलती से ऐसे प्रस्ताव भेजे भी जाते हैं, तो उन्हें तुरंत खारिज कर दिया जाएगा। सभी विभागों को इन निर्देशों का अत्यंत सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
पहले से सेवा विस्तार पर चल रहे अफसरों का क्या होगा?
कार्मिक विभाग की ओर से जारी इन नए निर्देशों में एक और महत्वपूर्ण बात पूरी तरह स्पष्ट की गई है। जो अधिकारी या कर्मचारी पहले से सेवा विस्तार या पुनः नियुक्ति पर कार्यरत हैं, वे अपनी तय अवधि पूरी होने तक ही काम करेंगे। उनकी यह निर्धारित अवधि समाप्त होते ही उन्हें स्वतः सेवानिवृत्त मान लिया जाएगा। इसके बाद उन्हें आगे कोई भी अतिरिक्त विस्तार बिल्कुल नहीं दिया जाएगा। सरकार ने इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू किया है।
वित्तीय संकट के कारण सुक्खू सरकार ले रही है कड़े फैसले
सुक्खू सरकार का यह कड़ा निर्णय ऐसे समय में आया है जब प्रदेश भारी वित्तीय संकट से गुजर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान समाप्त किए जाने के बाद राज्य की स्थिति बिगड़ी है। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने हाल ही में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन को छह महीने के लिए स्थगित किया था। मुख्यमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि राज्य को मजबूत बनाने के लिए आगे भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासनिक ढांचे में आएगी पारदर्शिता, युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका
सरकार का मुख्य तर्क है कि सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति की इस पुरानी प्रक्रिया को रोकने से प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता आएगी। इस बड़े फैसले से नई पीढ़ी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही इससे भारी सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि कठिन फैसले शुरुआत में चुनौतीपूर्ण जरूर लगते हैं, लेकिन लंबे समय में ये प्रदेश के हित में हमेशा सही होते हैं।

