पहाड़ी राज्य पर मंडराया दिवालिया होने का खतरा! 1.10 लाख करोड़ के भारी कर्ज के बीच सरकार फिर ले रही 1900 करोड़ का लोन

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति इन दिनों बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। राज्य सरकार नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना पहला बड़ा ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग की नई अधिसूचना के अनुसार सरकार 1900 करोड़ रुपये का भारी कर्ज उठाएगी। यह कर्ज दस वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से लिया जाएगा। इस कदम से राज्य के खजाने पर दबाव और अधिक बढ़ जाएगा। यह खबर राज्य के आर्थिक हालात पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

रिजर्व बैंक के जरिए होगी बांड की नीलामी

राज्य सरकार इस बांड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से करेगी। यह नीलामी सात अप्रैल को मुंबई स्थित रिजर्व बैंक के कार्यालय में होगी। इस बड़ी नीलामी प्रक्रिया में निवेशक हिस्सा लेंगे। इस भारी कर्ज को लेने के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है। राज्य सरकारों को बाजार से कर्ज उठाने के लिए हमेशा केंद्र की औपचारिक अनुमति की सख्त जरूरत होती है। इसके बिना कोई भी राज्य नया ऋण नहीं ले सकता है।

विकास कार्यों पर खर्च होगी करोड़ों की धनराशि

वित्त विभाग ने अपनी अधिसूचना में इस कर्ज के उपयोग की साफ जानकारी दी है। ऋण से मिलने वाली रकम राज्य के विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। सरकार इस पैसे को प्रदेश की महत्वपूर्ण योजनाओं में लगाएगी। हालांकि हिमाचल प्रदेश पर पहले से ही एक लाख दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी कर्ज मौजूद है। राज्य सरकार को हर महीने वेतन और पेंशन देने के लिए ही करीब 2800 करोड़ रुपये की बहुत बड़ी रकम चाहिए होती है।

नीलामी और बोलियों के लिए तय किए गए खास नियम

रिजर्व बैंक ने इस अहम नीलामी के लिए कई कड़े नियम तय किए हैं।

  • सात अप्रैल को सुबह साढ़े दस से साढ़े ग्यारह बजे तक प्रतिस्पर्धी बोलियां जमा होंगी।
  • गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियों के लिए सुबह ग्यारह बजे तक का समय दिया गया है।
  • कुल जारी राशि का दस प्रतिशत हिस्सा व्यक्तिगत निवेशकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
  • एक निवेशक के लिए निवेश की अधिकतम सीमा केवल 19 प्रतिशत तय की गई है।

बढ़ते आर्थिक बोझ से आम जनता में गहरी चिंता

हिमाचल की जनता लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ से काफी चिंतित है। हर नया कर्ज राज्य के भविष्य पर सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऋण लेकर खर्चे चलाना लंबे समय तक संभव नहीं है। सरकार को आय के नए साधन खोजने होंगे। यदि कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य भारी वित्तीय संकट में फंस सकता है। 1900 करोड़ रुपये का यह नया बड़ा कर्ज प्रदेश के मौजूदा आर्थिक संकट को और अधिक गहरा करने का ही काम करेगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories