Himachal News: हिमाचल प्रदेश की 3,757 पंचायतों में चुनावी सरगर्मी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए बहुप्रतीक्षित आरक्षण रोस्टर अब 7 अप्रैल 2026 को जारी किया जाएगा। पहले इस सूची के जल्दी आने की संभावना थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से अब इसमें देरी हुई है। इस फैसले ने उन हजारों उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जो अपनी किस्मत आजमाने के लिए वार्डों और पंचायतों की आरक्षण स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। सरकार के इस कदम से अब चुनावी गणित पूरी तरह बदलने के आसार हैं।
प्रशासनिक तैयारी और आरक्षण का गणित
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 3,757 पंचायतों के मुखिया और वार्ड सदस्यों के लिए सीटों का निर्धारण जनगणना और नियमों के आधार पर किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए सावधानी बरत रहे हैं। 7 अप्रैल को रोस्टर जारी होते ही यह साफ हो जाएगा कि कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित होगी। यह देरी उम्मीदवारों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनाने पर मजबूर कर रही है।
उम्मीदवारों की बढ़ी बेचैनी और चुनावी हलचल
गाँवों की चौपालों पर अब केवल एक ही चर्चा है कि उनकी पंचायत का भविष्य किसके हाथ में होगा। रोस्टर जारी होने की तारीख आगे बढ़ने से उन लोगों में सबसे ज्यादा बेचैनी है, जो महीनों से जमीन पर मेहनत कर रहे थे। यदि उनकी सीट आरक्षित हो जाती है, तो उन्हें नया चेहरा तलाशना होगा या अपनी दावेदारी छोड़नी होगी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार चुनाव में युवाओं और शिक्षित उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ने वाली है। 7 अप्रैल की तारीख अब हिमाचल की ग्रामीण राजनीति के लिए सबसे निर्णायक दिन साबित होने वाली है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर
सरकार और चुनाव आयोग इस बार पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखने का प्रयास कर रहे हैं। रोस्टर जारी करने में देरी का एक मुख्य कारण कानूनी अड़चनों से बचना भी बताया जा रहा है। पिछली बार की गलतियों से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार रोटेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू कर रहा है। जैसे ही 7 अप्रैल को जिला स्तर पर सूचियां चस्पा होंगी, चुनावी बिगुल पूरी तरह से बज जाएगा। तब तक के लिए सभी दावेदारों को ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपनानी होगी।

