Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार पर बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने दस हजार करोड़ रुपए का सालाना राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया है। यह कदम राज्य के पैरों में बेड़ियां डालने की एक सोची-समझी कोशिश है। मुख्यमंत्री शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने राज्य के वित्तीय हालात और विपक्ष के रवैये पर खुलकर अपनी बात रखी।
विपक्ष पर साधा निशाना, भाजपा को बताया पांच गुटों में बंटी पार्टी
मुख्यमंत्री ने अनुदान के अहम मुद्दे पर भाजपा के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा ने इस गंभीर मामले में राज्य सरकार का बिल्कुल साथ नहीं दिया। विपक्षी नेता न तो प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हुए और न ही विधानसभा में समर्थन दिया। सुक्खू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश भाजपा फिलहाल पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा गुट किसका विनाश करता है।
वेतन रोकने का फैसला और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मजबूत कदम
मुख्यमंत्री ने राज्य के वित्तीय अनुशासन पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि सरकार ने मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के वेतन का कुछ हिस्सा अस्थायी रूप से रोका है। सरकार बजट में कुछ जरूरी सुधारात्मक कदम उठा रही है। वित्तीय वर्ष का बजट कम होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि विकास रुक जाएगा। सरकार के इन कड़े फैसलों से राज्य की नींव मजबूत होगी। आने वाले समय में हिमाचल की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।
सरकारी नौकरी में सेवा विस्तार पर लगी रोक, नए चेहरों को मिलेगा मौका
सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। मेडिकल कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर नई नियुक्तियां लगातार जारी हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ जरूरी भर्तियां की गई हैं। इकतीस दिसंबर के बाद से सभी तरह के सेवा विस्तार पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब नए युवाओं को ज्यादा मौके मिलेंगे।
मई से पहले होंगे पंचायत चुनाव, हाईकोर्ट के फैसले का होगा पूरा सम्मान
पंचायत चुनावों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। राज्य सरकार इकतीस मई से पहले हर हाल में पंचायत चुनाव संपन्न करवाएगी। उपायुक्तों को पांच फीसदी आरक्षण देने के मंत्रिमंडल के फैसले पर न्यायालय ने रोक लगा दी है। सरकार ने न्यायालय के इस आदेश का पूरी तरह से पालन करने की बात कही है। इसके अलावा उन्होंने पवन खेड़ा पर असम के मुख्यमंत्री की हालिया टिप्पणी को भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।


