Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव लड़ने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खबर है। राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नियमों को काफी सख्त कर रही है। अब दागी, नशे के तस्कर और बैंक के डिफाल्टर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। अगर प्रधान पर नशा तस्करी (चिट्टा) का आरोप सिद्ध हुआ, तो उसे तुरंत अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी। सरकार ने यह अहम विधेयक बुधवार को विधानसभा में पेश कर दिया है। इसे गुरुवार को सदन से सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है।
नशे के तस्करों और अवैध कब्जाधारियों पर गिरेगी गाज
राज्य सरकार गांवों में साफ-सुथरी और ईमानदार छवि वाले नेता चाहती है। इसलिए पुराने नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। चिट्टे (नशे) के व्यापार में शामिल लोग अब चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेंगे। प्रधान बनने के बाद दोषी पाए जाने पर उसे तुरंत पद से हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही एक और सख्त नियम लागू किया गया है। सरकारी या पंचायत भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग भी अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
बैंक के डिफाल्टर भी चुनावी रेस से हुए बाहर
पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। नए कानून के तहत सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टर चुनाव के लिए पूरी तरह अयोग्य होंगे। जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट की रिकवरी बकाया है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकते। सरकार का मानना है कि इन सख्त फैसलों से पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार काफी हद तक कम होगा। इससे ग्रामीण विकास की योजनाएं सही तरीके से जमीन पर लागू हो सकेंगी।
कोरम के नियमों में भी हुआ बड़ा और अहम बदलाव
सरकार ने पंचायत और जिला परिषद की बैठकों के कोरम नियम भी बदल दिए हैं। अब पंचायत का कोरम पूरा करने के लिए परिवार का प्रतिनिधित्व आधार नहीं होगा। ग्राम सभा में कुल वोटरों की 10 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। वहीं, जिला परिषद बैठकों में पहले आधे सदस्यों की उपस्थिति जरूरी होती थी। अब इसे घटाकर एक तिहाई (वन थर्ड) कर दिया गया है। कोरम पूरा न होने से योजनाएं अटक जाती थीं। नए नियम से विकास योजनाओं को जल्दी मंजूरी मिल सकेगी।

