Himachal News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी खजाने से वीआईपी मेहमानों की खातिरदारी पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने 426 खास लोगों को ‘स्टेट गेस्ट’ यानी राज्य अतिथि का विशेष दर्जा दिया है। इन शाही मेहमानों के रहने, खाने-पीने और घूमने-फिरने पर सरकार ने लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम खर्च की है। विधानसभा के बजट सत्र की आखिरी बैठक में गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक लिखित जवाब में यह अहम जानकारी साझा की। आनी क्षेत्र के विधायक लोकेंद्र कुमार ने यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया था।
किस साल कितने लोगों को मिला राजकीय अतिथि का दर्जा?
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में खर्च और मेहमानों का पूरा हिसाब पेश किया है। एक जनवरी 2023 से 31 जनवरी 2026 तक कुल 426 लोग राज्य अतिथि बने। साल 2023 में 143 और वर्ष 2024 में 127 लोगों को यह शानदार दर्जा मिला। इसके बाद साल 2025 में 149 और जनवरी 2026 में 7 लोग राजकीय अतिथि घोषित किए गए। इन सभी लोगों के बेहतरीन खान-पान और ठहरने पर 4.86 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं, इनके आने-जाने की वीआईपी गाड़ियों पर करीब 1.65 करोड़ रुपये लुटाए गए। इस तरह सरकार का कुल खर्च साढ़े छह करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
क्या हैं स्टेट गेस्ट बनाने के सरकारी नियम?
हिमाचल प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को ‘हिमाचल प्रदेश राज्य अतिथि नियम-1990’ के तहत यह शाही सुविधा दी जाती है। इन नियमों के अनुसार देश के विभिन्न उच्च पदों पर बैठे लोगों को यह सम्मान मिलता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्य में आने वाले प्रतिनिधियों को भी सरकारी खर्चे पर यह सुविधा दी जाती है। सुविधा और पद के हिसाब से सरकार ने इन सभी मेहमानों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है।
इन चार श्रेणियों में मिलती है यह वीआईपी सुविधा
राजकीय अतिथि घोषित करने के लिए नियम-1990 के तहत चार प्रमुख श्रेणियां बनाई गई हैं:
- पहली श्रेणी में देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, सेना प्रमुख और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री जैसे शीर्ष लोग आते हैं।
- दूसरी श्रेणी में अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष, सीएजी, मुख्य चुनाव आयुक्त, राज्यों के मुख्य सचिव, प्राकृतिक आपदा आकलन टीम और रेलवे बोर्ड के सदस्य शामिल होते हैं।
- तीसरी श्रेणी के तहत विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और एसपीजी या एनएसजी के अधिकारियों को किसी विशेष दौरे पर यह महत्वपूर्ण दर्जा मिलता है।
- चौथी श्रेणी में सरकारी विभागों या निगमों के जरूरी काम से आने वाले लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री की खास मंजूरी से इन्हें राज्य अतिथि बनाया जाता है। हालांकि, इनका पूरा खर्च संबंधित सरकारी विभाग ही उठाता है।

