Himachal News: कुल्लू जिले के नरोगी में देवदार के पेड़ों की बेरहमी से कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां वन माफिया और वन विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से जंगलों का सफाया किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अवैध कटान के सबूत मिटाने के लिए पेड़ों के ठूंठों को जमीन के पास से काटकर उन पर मिट्टी डाली जा रही है। लोगों ने जंगल में जाकर इस ‘काली कमाई’ के सबूतों को मिट्टी से बाहर निकाल दिया है। मामले में जमीन धंसने से गिरे सैकड़ों पेड़ों को भी खुर्द-बुर्द करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सबूत मिटाने की खौफनाक साजिश
नरोगी गांव के लोगों ने वन कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वन काटुओं ने कर्मचारियों की मिलीभगत से पेड़ों को जमीन के बिल्कुल पास से काटा। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए ठूंठों पर मिट्टी डाल दी गई। लेकिन गांव वालों ने चुपचाप जंगल पहुंचकर ठूंठों से मिट्टी हटा दी। इस तरह उन्होंने वन विभाग की इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया। इलाके से देवदार और कायल के बेशकीमती पेड़ लगभग पूरी तरह गायब हो चुके हैं।
गिरे हुए 400 पेड़ों का भी किया सौदा
स्थानीय निवासी विनोद कुमार और अन्य लोगों ने एक और बड़ा खुलासा किया है। क्षेत्र में जमीन धंसने के कारण करीब 400 पेड़ गिर गए थे। आरोप है कि वन कर्मियों ने इन गिरे हुए पेड़ों को भी बेच डाला। विनोद कुमार की दो बीघा जमीन भी धंस गई थी। उसमें गिरे देवदार और अन्य प्रजातियों के पेड़ों को भी खुर्द-बुर्द कर दिया गया। अब मौके पर नाममात्र के ही पेड़ बचे हैं।
रक्षक ही कर रहे जंगलों का सफाया
ग्रामीणों का साफ कहना है कि कुछ वन कर्मी पूरी बीट में तबाही मचा रहे हैं। वे वन काटुओं को संरक्षण देकर हरे-भरे वनों को उजाड़ रहे हैं। लोगों ने इस लूट पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है। वहीं, कुल्लू के वन अरण्यपाल संदीप शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने पार्वती वन मंडल के अधिकारी से रिपोर्ट मांगकर निष्पक्ष जांच का पूरा भरोसा दिया है।

