Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 870 शारीरिक शिक्षकों (पीईटी) की भर्ती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बेरोजगार युवा पिछले आठ साल से इस भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। अब शिक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली ने युवाओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जिलों से जरूरी दस्तावेज न मिलने के कारण यह भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर बीच में ही लटकती नजर आ रही है।
अधिकारियों की सुस्ती से बढ़ा युवाओं का तनाव
बेरोजगार शारीरिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष रमेश राजपूत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। शिमला शिक्षा विभाग ने 19 मार्च को सभी जिलों से जरूरी रिकॉर्ड मांगा था। अधिकारियों को यह सारा डाटा पांच दिन के भीतर विभाग को भेजना था। लेकिन कई जिलों से अभी तक कोई जानकारी नहीं भेजी गई है। इसी प्रशासनिक सुस्ती के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया बहुत धीमी पड़ गई है।
पंचायत चुनाव की आचार संहिता का सता रहा डर
बेरोजगार संगठन को अब आगामी पंचायत चुनाव का डर सता रहा है। अगर यह भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी नहीं हुई, तो चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। इससे यह भर्ती एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली जाएगी। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव से पहले भर्ती पूरी करने का ठोस भरोसा दिया था। अब मौजूदा हालात देखकर बेरोजगार युवाओं में भारी निराशा और गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
उम्र बीत रही, युवाओं का टूट रहा नौकरी का सपना
प्रदेश के हजारों युवा पिछले आठ-नौ साल से इस भर्ती की राह देख रहे हैं। कई योग्य उम्मीदवारों की उम्र नौकरी की तय सीमा को पार कर रही है। अगर यह भर्ती फिर टली, तो कई युवाओं का सरकारी नौकरी का सपना हमेशा के लिए टूट जाएगा। प्रदेश के स्कूलों में पीईटी शिक्षकों की भारी कमी चल रही है। इससे बच्चों की खेल गतिविधियों और उनके शारीरिक विकास पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री के वादे और युवाओं की मुख्य मांगें
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर रुकी हुई भर्तियों को पूरा करने का दावा कर चुके हैं। बेरोजगार युवाओं ने सरकार और प्रशासन के सामने कुछ अहम मांगें रखी हैं:
- सभी जिला उपनिदेशक तुरंत खाली पदों का लंबित रिकॉर्ड शिमला भेजें।
- काउंसलिंग की तारीख तय करके प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
- पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले सभी 870 पदों पर नियुक्तियां दी जाएं।


