स्मार्ट सिटी का बाइक शेयरिंग सिस्टम फ्लॉप, लाखों की साइकिलें गायब, ठेले लगने लगे

Prayagraj News: स्मार्ट सिटी में साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए लाया गया बाइक शेयरिंग सिस्टम खुद एक सवालिया निशान बन गया है। पब्लिक की लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी के चलते बड़ी संख्या में साइकिलें कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। स्मार्ट सिटी के नाम पर एक और प्लानिंग का बजट बर्बाद होने की कगार पर आ गया है। यह योजना पर्यावरण सुधार और लोगों की सेहत सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

धीरे-धीरे गायब हो रही साइकिलें

शहर स्मार्ट सिटीमें शामिल हुआ तो कई नए काम किए गए। इनमें बाइक शेयरिंग भी था। शहर में कुल 75 स्थानों पर बाइक शेयरिंग सिस्टम विकसित किया गया था। स्मार्ट सिटी का दावा है कि 73 जगह पर यह पूरी तरह काम कर रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि जहां चंद साइकिलें रखी हैं, वे स्थान भी उतने नहीं बचे हैं। शुरुआती दौर में करीब चार करोड़ की लागत से 750 साइकिलें लगाई गई थीं।

रखरखाव में कमी से चौपट हुई व्यवस्था

शुरूमें छात्रों ने इसका खूब इस्तेमाल किया। लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारों ने साइकिलों के मेंटीनेंस और रखरखाव पर ध्यान देना बंद कर दिया। परिणाम यह है कि दर्जनों ऐसे स्थान हैं जहां आज साइकिल दिखाई ही नहीं देती। दो अक्टूबर 2021 को शुरू हुई इस योजना को पांच साल के लिए एजेंसी को दिया गया था। अब कई जगहों पर अतिक्रमण हो गया है। कहीं पाव भाजी और सैंडविच के ठेले लग रहे हैं, तो कहीं सरकारी कबाड़ भर दिया गया है।

रजिस्ट्रेशन शुल्क और चार्ज

इस सिस्टम काउपयोग करने के लिए 300 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क रखा गया था। एक ऐप डाउनलोड करना होता है। ऐप अनइंस्टॉल करने पर पैसा वापस करने का भी नियम है। शुरुआती आधे घंटे की साइकिल पर कोई चार्ज नहीं है। इसके बाद प्रति घंटे दस रुपये चार्ज लगता है।

लोगों ने जताई नाराजगी

स्थानीय निवासियोंका कहना है कि शुरुआत में व्यवस्था ठीक थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह फ्लॉप हो गई है। स्टैंड प्वाइंट पर पर्याप्त साइकिल नहीं हैं। जो कुछ हैं, उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। कटका झूंसी के रोहित यादव ने बताया कि उनके एरिया में यह बेकार हो चुका है। रानी मंडी चौक के शाहिद रिजवी ने कहा कि कई जगह साइकिलें नजर ही नहीं आतीं।

एजेंसी के भुगतान पर विचार

स्मार्ट सिटीमिशन के अधिकारी मानते हैं कि भविष्य में हालात बेहतर नहीं रहे तो एजेंसी के भुगतान पर विचार किया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अटाला चौराहे के पास बनाई गई यह व्यवस्था पूरी तरह गायब हो गई है। स्टैंड तो है, लेकिन साइकिल नहीं रहती। कुल मिलाकर यह प्लान अब सफल नहीं माना जा रहा है।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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