World News: यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरी दुनिया, खासकर खाड़ी देशों में खलबली मचा दी है। जेलेंस्की का दावा है कि रूस के जासूसी उपग्रहों ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य ठिकानों की टोह ली है। रूसी सैटेलाइट्स ने ईरानी हमले से ठीक पहले इन रणनीतिक ठिकानों की हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें खींची हैं। जेलेंस्की के अनुसार, यह डेटा सीधे ईरान को सौंपा जा रहा है। इसका मकसद पश्चिमी देशों के ठिकानों पर सटीक निशाना साधना हो सकता है। इस खुलासे के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
रूसी सैटेलाइट्स की नजर में डिएगो गार्सिया और प्रिंस सुल्तान बेस
जेलेंस्की ने शनिवार को बताया कि रूसी उपग्रहों ने 24 और 25 मार्च को खाड़ी क्षेत्र की निगरानी की। उन्होंने दावा किया कि 24 मार्च को चागोस द्वीप समूह स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य ठिकाने की तस्वीरें ली गईं। यह अमेरिका और ब्रिटेन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त सैन्य अड्डा है। इसके अलावा, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस को भी निशाने पर रखा गया। जेलेंस्की ने इसे भविष्य में होने वाले किसी बड़े हमले की तैयारी का संकेत बताया है। रूस की इस हरकत ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डाल दिया है।
कुवैत और सऊदी के तेल क्षेत्रों की जासूसी
खुफिया जानकारी के मुताबिक, केवल सैन्य ठिकाने ही रूस और ईरान के निशाने पर नहीं हैं। जासूसी उपग्रहों ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और ग्रेटर बुरगान तेल क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की भी तस्वीरें ली हैं। जेलेंस्की ने कहा कि 25 मार्च को सऊदी अरब के शायबा तेल और गैस क्षेत्र की रेकी की गई। तुर्किये में स्थित इंसिरलिक एयर बेस और कतर का अल उदैद एयर बेस भी इस जासूसी के दायरे में आए हैं। तेल और गैस क्षेत्रों की टोह लेना वैश्विक अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
प्रतिबंध हटाने के कदम को जेलेंस्की ने बताया ‘पाखंड’
जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों के रवैये पर भी कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि रूस खुलेआम ईरान को खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है। ऐसे में रूस पर से प्रतिबंधों को हटाने की चर्चा करना पूरी तरह पाखंडपूर्ण है। राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि इस खुफिया जानकारी का इस्तेमाल अमेरिका और ब्रिटेन के हितों के खिलाफ होगा। रूस और ईरान का यह गठबंधन पश्चिम एशिया में शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस गठबंधन के खिलाफ एकजुट होने और सख्त कदम उठाने की अपील की है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता महायुद्ध का खतरा
रूस और ईरान की इस सक्रियता ने खाड़ी देशों में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए ठिकानों की कमजोरियों को पहचाना जा रहा है। ईरान अक्सर अमेरिकी मौजूदगी का विरोध करता रहा है और अब उसे रूस का तकनीकी साथ मिल गया है। अगर इन तस्वीरों के आधार पर कोई हमला होता है, तो यह वैश्विक महायुद्ध की शुरुआत हो सकती है। फिलहाल, अमेरिकी पेंटागन और अन्य एजेंसियां इन दावों की गंभीरता से जांच कर रही हैं।


