पेट्रोल-गैस के बाद अब हीलियम पर भारी संकट, होर्मुज की बंदी से भारत के AI मिशन पर लगा ब्रेक?

National News: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की मुश्किलों को एक बार फिर बढ़ा दिया है। ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के बंद होने से देश में केवल पेट्रोल, एलपीजी और खाद का ही संकट नहीं गहराया है। अब भारत के हाई-टेक भविष्य यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिप निर्माण पर भी काले बादल मंडराने लगे हैं। इस समुद्री रास्ते की बंदी की वजह से ‘हीलियम गैस’ (Helium Gas) की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। यह गैस सेमीकंडक्टर चिप बनाने के लिए अनिवार्य है। भारत का अपना एआई चिप बनाने का संकल्प अब एक बड़ी अग्निपरीक्षा के दौर से गुजर रहा है।

चिप निर्माण और एआई मिशन के लिए क्यों जरूरी है हीलियम?

हीलियम गैस का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर और एआई चिप्स के उत्पादन में शीतलक (Coolant) के रूप में किया जाता है। इसके बिना चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों में काम जारी रखना लगभग नामुमकिन है। भारत इस समय कतर और अमेरिका जैसे देशों से भारी मात्रा में हीलियम का आयात करता है। कतर से आने वाली सप्लाई इसी होर्मुज जलमार्ग के जरिए भारत पहुंचती है। इस रास्ते के बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई है। इससे भारत के उन बड़े प्रोजेक्ट्स को झटका लग सकता है, जो देश को ग्लोबल चिप हब बनाने की तैयारी में जुटे थे।

कतर से सप्लाई बंद होने से पैदा हुआ नया सिरदर्द

दुनिया में हीलियम गैस के उत्पादन में कतर का बहुत बड़ा हिस्सा है। भारत अपनी हीलियम की जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर पर निर्भर रहता है। समुद्री मार्ग बंद होने के कारण जहाजों का आना-जाना रुक गया है। इससे घरेलू उद्योगों में हीलियम का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। अगर जल्द ही वैकल्पिक रास्ता नहीं तलाशा गया, तो भारत के टेक सेक्टर में मंदी का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

क्या भारत खुद पैदा कर पाएगा हीलियम का विकल्प?

इस संकट ने एक बार फिर भारत को आत्मनिर्भर बनने की याद दिलाई है। भारत के पास हीलियम के कुछ प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं, लेकिन उनका व्यावसायिक उपयोग अभी शुरुआती स्तर पर है। पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों और राजस्थान में हीलियम के भंडार की संभावनाएं जताई गई हैं। विशेषज्ञ अब सरकार को सलाह दे रहे हैं कि घरेलू स्रोतों से हीलियम निकालने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। जब तक भारत इस गैस के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहेगा, तब तक वैश्विक युद्ध ऐसी ही परेशानियां खड़ी करते रहेंगे।

अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक पर दोहरी मार

होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी भारत के लिए दोहरी मार साबित हो रही है। एक तरफ आम जनता पेट्रोल और रसोई गैस की किल्लत से जूझ रही है। वहीं दूसरी तरफ, देश का भविष्य कही जाने वाली तकनीक और एआई चिप इंडस्ट्री संकट में है। इस गैस की कमी से न केवल चिप निर्माण, बल्कि अस्पतालों में एमआरआई (MRI) मशीनों और रॉकेट लॉन्चिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर भी असर पड़ सकता है। सरकार अब इस नए संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक और तकनीकी रास्ते तलाश रही है।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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