Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। ऐतिहासिक रिज मैदान पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने की मांग ने तूल पकड़ लिया है। दलित समुदाय ने राज्य सरकार पर घोर अपमान और दोहरे मापदंड के गंभीर आरोप लगाए हैं। अंबेडकर प्रतिमा संघर्ष समिति ने सरकार को 60 दिन के भीतर मूर्ति स्थापित करने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है।
रिज मैदान पर सरकार का दोहरा रवैया
अंबेडकर प्रतिमा संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को एक कड़ा विरोध पत्र लिखा है। समिति के अध्यक्ष रवि कुमार दलित ने सरकारों पर 20 साल से धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 से समाज लगातार बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने की मांग कर रहा है। लेकिन हर बार सरकार रिज मैदान को खतरे की जद में बताकर अपना पल्ला झाड़ लेती है।
वाजपेयी और वीरभद्र की मूर्ति पर उठे सवाल
दलित समाज ने सीधे तौर पर सरकारों की नीयत पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि बाबा साहेब के नाम पर रिज मैदान को खतरा बताया जाता है। जबकि उसी मैदान पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा लगा दी गई। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मूर्ति के लिए भी मैदान सुरक्षित मान लिया गया। इसे दलितों और संविधान निर्माता का सीधा अपमान बताया गया है।
60 दिन का अल्टीमेटम और बड़े आंदोलन की चेतावनी
संघर्ष समिति ने हिमाचल सरकार को 60 दिन का साफ अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की है कि या तो वाजपेयी और वीरभद्र सिंह की मूर्तियां तुरंत हटाई जाएं। या फिर उसी स्थान पर बाबा साहेब की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए। सरकार ने अगर इस बार भी उचित मांग को नजरअंदाज किया, तो राज्य में एक बड़ा आंदोलन होगा। समाज अब सड़कों पर उतरने और आर-पार की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।


