क्या विधवा बहू को उठाना होगा सास-ससुर का खर्च? इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से मची हलचल

Uttar Pradesh News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सास-ससुर के भरण-पोषण को लेकर एक बेहद बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि एक बहू अपने सास-ससुर का खर्च उठाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। जस्टिस मदन पाल सिंह की सिंगल बेंच ने यह अहम आदेश पारित किया है। अदालत ने आगरा फैमिली कोर्ट के फैसले को पूरी तरह सही माना है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने सास-ससुर की क्रिमिनल रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है।

नैतिक जिम्मेदारी को नहीं बना सकते कानूनी बाध्यता

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कानूनी प्रावधानों को बहुत बारीकी से समझाया है। अदालत ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 144 या सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण एक वैधानिक अधिकार है। कानून में उन लोगों की सूची स्पष्ट है जो यह दावा कर सकते हैं। इस सूची में सास-ससुर को शामिल नहीं किया गया है। कानून बनाने वालों की मंशा बहू पर यह जिम्मेदारी डालने की नहीं थी। अदालत ने माना कि नैतिक जिम्मेदारी चाहे कितनी भी बड़ी हो, उसे बिना कानून के जबरन लागू नहीं किया जा सकता।

आगरा के इस परिवार का क्या था पूरा मामला?

यह पूरा मामला आगरा के रहने वाले राकेश कुमार और नीरज देवी से जुड़ा है। उनके बेटे प्रवेश कुमार की शादी 26 अप्रैल 2016 को हुई थी। मार्च 2021 में प्रवेश कुमार का निधन हो गया था। बुजुर्ग माता-पिता ने अपनी बहू से गुजारा भत्ता मांगने के लिए आगरा फैमिली कोर्ट में अर्जी दी थी। 21 अगस्त 2025 को फैमिली कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद बुजुर्ग दंपती ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

बहू पुलिस कांस्टेबल है, लेकिन अनुकंपा नौकरी का सबूत नहीं

सास-ससुर के वकील ने हाई कोर्ट में कई बड़ी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बुजुर्ग, अनपढ़ और बेहद गरीब हैं। उनका दावा था कि बहू उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल है और अच्छा कमाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बहू को मृतक पति के सभी सेवा लाभ मिल चुके हैं। हालांकि, बहू के वकील ने इन सभी दावों का कड़ा विरोध किया। अदालत ने पाया कि बहू को यह नौकरी अनुकंपा के आधार पर मिली है, इसका कोई भी सबूत रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। संपत्ति के विवाद भी भरण-पोषण की इस कार्यवाही के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories