New Delhi News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार में बड़ा उलटफेर कर दिया है। उन्होंने ब्रांडेड दवाओं के आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। साथ ही स्टील, एल्यूमीनियम और तांबे पर लगने वाले शुल्क के पूरे नियम बदल दिए गए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठा है जब ईरान संघर्ष से ऊर्जा की कीमतें पहले से आसमान छू रही हैं। ट्रंप ने दवा आयात को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जोड़ते हुए विदेशी कंपनियों के लिए सख्त शर्तें रखी हैं। भारत जैसे देशों पर इस फैसले का गहरा असर पड़ने की आशंका है।
दवाओं पर 100% टैरिफ: क्या है नई शर्त?
ट्रंप प्रशासन नेफार्मा सेक्टर में बड़ा बदलाव किया है। अब विदेशी पेटेंट दवा कंपनियों को अमेरिका में दवाओं के दाम कम करने होंगे। साथ ही उन्हें अपना उत्पादन अमेरिका शिफ्ट करना होगा। पूरी तरह शिफ्ट होने वाली कंपनियों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। आंशिक रूप से शिफ्ट होने वाली कंपनियों पर 20% ड्यूटी होगी। जो कंपनियां शर्तें नहीं मानेंगी, उन पर 100% तक टैरिफ लगाया जाएगा।
मित्र देशों को राहत, ब्रिटेन को खास सौदा
यूरोपीय संघ,जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड के लिए टैरिफ की सीमा 15% रखी गई है। ब्रिटेन के साथ विशेष समझौता हुआ है। उसकी दवाओं पर तीन साल तक जीरो टैरिफ रहेगा। बड़ी दवा कंपनियों को नियम मानने के लिए 120 दिन मिलेंगे। छोटी कंपनियों को 180 दिन की मोहलत दी गई है।
स्टील, एल्यूमीनियम और कॉपर टैरिफ में बड़ा बदलाव
ट्रंप नेधातुओं के आयात के नियम सरल कर दिए हैं। कच्चे स्टील, एल्यूमीनियम और तांबे पर 50% टैरिफ बना रहेगा। लेकिन अब इसकी गणना ‘इंपोर्ट वैल्यू’ पर नहीं, बल्कि अमेरिकी ग्राहकों द्वारा चुकाई गई ‘बिक्री कीमत’ पर होगी। इससे कम कीमत दिखाकर टैक्स चोरी करने वालों पर लगाम लगेगी। जिन उत्पादों में स्टील या एल्यूमीनियम का इस्तेमाल होता है, उन पर ड्यूटी 50% से घटाकर 25% कर दी गई है।
15% से कम धातु वाले उत्पादों पर जीरो ड्यूटी
अगर किसीउत्पाद (जैसे इत्र की बोतल का ढक्कन या डेंटल फ्लॉस का कटर) में धातु की मात्रा वजन के अनुसार 15% से कम है, तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों के लिए टैरिफ 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है। इससे देश में औद्योगिक निर्माण तेज होगा। जो उत्पाद विदेशों में बने हैं लेकिन उनमें पूरी तरह अमेरिकी स्टील या एल्यूमीनियम का उपयोग हुआ है, उन पर केवल 10% टैरिफ लगेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अमेरिकीप्रशासन का कहना है कि पुराने टैरिफ नियम बहुत जटिल थे। इससे आयातकों को परेशानी होती थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कुछ टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया था। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। उसकी भरपाई करना भी इस फैसले का उद्देश्य है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने इसे वैश्विक व्यापार के लिए ‘रीसेट बटन’ बताया है।
भारत पर क्या होगा असर?
ट्रंप केइस फैसले का भारत पर गहरा और मिला-जुला असर पड़ेगा। भारत अमेरिका को जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं का बड़ा निर्यातक है। 100% टैरिफ के डर से भारतीय दवा कंपनियों को कीमतें काफी कम करनी होंगी या अमेरिका में प्लांट लगाने होंगे। इससे उनकी लागत बढ़ सकती है। स्टील और एल्यूमीनियम के डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स (जैसे ऑटो पार्ट्स) पर 25% टैरिफ भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों के लिए चुनौती बना रहेगा। अगर भारतीय कंपनियां बढ़े हुए टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो अमेरिकी बाजार में उनके उत्पाद महंगे हो जाएंगे। हालांकि, अगर भारत सरकार ब्रिटेन या ईयू जैसा कोई विशेष व्यापार समझौता कर लेती है, तो भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

