New Delhi News: ईरान-इजरायल युद्ध ने दुनिया भर के बाजारों में आग लगा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कच्चा तेल 122 डॉलर प्रति बैरल के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है। ऐसे में महंगाई बढ़ना तय था। लेकिन केंद्र सरकार ने आम आदमी को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उसने 41 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया है। यह राहत 2 अप्रैल से 30 जून 2026 तक लागू रहेगी।
किन चीजों पर हटा टैक्स?
सरकार नेप्लास्टिक, दवा, कपड़े और ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले 41 प्रमुख पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर सीमा शुल्क खत्म कर दिया है। इनमें मेथेनॉल, स्टाइरीन और पीवीसी जैसे नाम शामिल हैं। कंपनियां अब विदेशों से कच्चा माल बिना टैक्स ला सकेंगी। इससे उत्पादन लागत घटेगी और बाजार में कीमतें स्थिर रहेंगी।
रसोई से लेकर कार तक, हर जगह मिलेगी राहत
इस फैसलेका असर आपके रोजमर्रा के सामानों पर सीधा पड़ेगा। दूध की बोतलें, जूस के पैक, शॉपिंग बैग, डिस्पोजेबल प्लेट और फूड कंटेनर सस्ते हो सकते हैं। पेंट, गोंद, टीवी-कंप्यूटर के पार्ट्स और बच्चों के खिलौने भी सस्ते मिलेंगे। दवाइयों, ब्लड बैग, मेडिकल ट्यूबिंग और कपड़ों के फाइबर की लागत भी कम होगी। यानी किचन से लेकर हेल्थ और गैजेट्स तक, हर जगह राहत पहुंचेगी।
सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर भी काटी ड्यूटी
प्राइवेट कंपनियोंने तेल सप्लाई चेन टूटने के बाद दाम बढ़ाने शुरू कर दिए थे। सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी थी। साथ ही, देश में तेल की कमी न हो, इसलिए डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई है। इससे घरेलू कंपनियां पहले देश की जरूरतें पूरी करेंगी।
क्यों जरूरी था यह कदम?
फरवरी2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल की ईरान से सैन्य भिड़ंत के बाद कच्चे तेल के दाम रातों-रात 50% से ज्यादा उछल गए। शिपिंग खर्च बढ़ने से फर्टिलाइजर और गैस के दाम भी आसमान छूने लगे थे। अगर सरकार आयात शुल्क में यह ढील न देती, तो पैकेजिंग से लेकर दवाओं तक हर चीज महंगी हो जाती। इस समयबद्ध फैसले से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ऑक्सीजन मिली है। अब उम्मीद है कि युद्ध के इस दौर में भी आम आदमी को महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी।

