Middle East News: खाड़ी के देशों में बारूद की गंध अब और गहरी हो गई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब उस खतरनाक मोड़ पर है, जहां से सिर्फ तबाही का मंजर नजर आता है। ईरान ने सीधे तौर पर वाशिंगटन को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘अब्राहम लिंकन’ उसकी मिसाइल रेंज में आया, तो उसे समंदर में दफन कर दिया जाएगा। ड्रोन और मिसाइलों के निरंतर हमलों ने पूरे क्षेत्र को ‘हाई अलर्ट’ पर डाल दिया है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर होते प्रहारों ने दुनिया की सांसें अटका दी हैं।
अमरीका का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और आधी रात का मिशन
ईरान की धमकियों के बीच अमेरिका ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। समंदर के सीने पर तैरते विशालकाय जहाज USS अब्राहम लिंकन (CVN 72) पर हलचल तेज है। यहाँ तैनात F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के लिए तैयार किया गया है। ये विमान रात के अंधेरे में भी दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखते हैं। पेंटागन ने साफ कर दिया है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
खाड़ी देशों में बिछा एयर डिफेंस सिस्टम का जाल
युद्ध की इस आग से यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे देश भी अछूते नहीं हैं। दुबई और दोहा जैसे चमचमाते शहरों में डर का साया है। संभावित हमलों को देखते हुए इन देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है। खाड़ी के आसमान में अब चौबीसों घंटे रडार की नजरें टिकी रहती हैं। इन देशों को डर है कि दो दिग्गजों की इस लड़ाई में उनके शांत शहर कहीं मलबे में न तब्दील हो जाएं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: दुनिया की तेल की नब्ज पर खतरा
सबसे बड़ी चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति की धड़कन माना जाता है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है या यहाँ संघर्ष बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। कच्चे तेल के भाव में अभी से जो उछाल दिख रहा है, वह भविष्य की एक डरावनी झलक मात्र है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र की अपील
इस भीषण तनाव का सीधा असर दुनिया की जेब पर पड़ने वाला है। सप्लाई चेन बाधित होने से महंगाई का ऐसा तूफान आ सकता है जिसे संभालना मुश्किल होगा। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के बड़े देश बार-बार संयम बरतने की गुहार लगा रहे हैं। कूटनीतिक प्रयास तो जारी हैं, लेकिन जमीन पर बरसते गोलों और मिसाइलों के बीच शांति की आवाजें दबती जा रही हैं। फिलहाल मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें धुंधली पड़ती दिख रही हैं।


