Himachal News: सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशु अब किसी के लिए मुसीबत नहीं बनेंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी ने एक बेहद शानदार और क्रांतिकारी पहल शुरू की है। संस्थान अपने कैंपस में 20 किलोवाट क्षमता का एक अनोखा बायोगैस पावर प्लांट लगा रहा है। यहां बेसहारा गायों के गोबर से सीधा मीथेन और हाइड्रोजन गैस बनाई जाएगी। इस गैस को आधुनिक तकनीक से हाइड्रोजन तेल में बदला जाएगा। इस अनूठी पहल से न केवल पर्यावरण बचेगा, बल्कि बेसहारा पशुओं को नया आश्रय भी मिलेगा।
गोबर से हाइड्रोजन तेल तक का सफर
IIT मंडी सिर्फ एक शैक्षणिक और शोध संस्थान नहीं है। अब यह बेसहारा पशुओं के लिए एक बड़ा सहारा बन रहा है। कटौला-कमांद मार्ग पर बेसहारा गायों की भारी समस्या थी। संस्थान ने इसका सटीक तकनीकी हल निकाला है। कैंपस में 20 किलोवाट का बायोगैस वेस्ट पावर प्लांट लगाया जा रहा है। इस प्लांट में गाय के गोबर का पूरा उपयोग होगा। इससे सबसे पहले मीथेन गैस तैयार की जाएगी। बाद में उच्च तकनीक से मीथेन को हाइड्रोजन में बदला जाएगा। अंततः इससे हाइड्रोजन तेल बनेगा। यह कदम हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ी कामयाबी है।
सब्जियों और फलों के कचरे से भी बनेगी ऊर्जा
संस्थान का यह खास मिशन केवल गोबर तक सीमित नहीं रहेगा। अभी IIT मंडी ने 40 बेसहारा गायों को अपने यहां आश्रय दिया है। इसके अलावा कैंपस की मेस से निकलने वाली सब्जियों का कचरा भी काम आएगा। फ्लैट्स और अपार्टमेंट से निकलने वाले फलों के छिलके भी ऊर्जा बनाएंगे। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के वेस्ट का भी इसमें पूरा इस्तेमाल होगा। इन सभी चीजों से बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा बनाई जाएगी। भविष्य में इसी तर्ज पर मंडी शहर में भी एक बड़ा प्लांट लगाने की योजना है।
किसानों से गोबर खरीदेगा संस्थान, बढ़ेगी आय
इस बड़े प्रोजेक्ट का फायदा सीधा स्थानीय ग्रामीणों को भी मिलेगा। IIT मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने इस पूरी योजना की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट केवल कैंपस तक ही सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में प्लांट की जरूरत पूरी करने के लिए ग्रामीणों से गोबर खरीदा जाएगा। इससे सड़कों पर आवारा पशुओं की संख्या अपने आप कम हो जाएगी। साथ ही स्थानीय किसानों और पशुपालकों की आय में सीधा इजाफा होगा। यह योजना गांव की अर्थव्यवस्था को एक नई ताकत देगी।


