New Delhi News: ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई है। अब कई देश मिलकर वैकल्पिक रास्ते पर विचार कर रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी और उद्योगपति पाइपलाइनों और अन्य ट्रांसपोर्ट लिंक के जरिए तेल आयात-निर्यात को भविष्य का रास्ता मान रहे हैं। इस चर्चा में प्रस्तावित इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) एक बड़ा विकल्प बनकर उभरा है। इससे भारत सीधे मध्य एशिया के रास्ते यूरोप से जुड़ जाएगा।
खाड़ी देश भी चाहते हैं होर्मुज का बाइपास
युद्ध नेखाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को भी लड़खड़ा दिया है। लंबे समय से तेल के आयात-निर्यात के लिए होर्मुज का इस्तेमाल होता रहा है। यही रास्ता आज ऊर्जा संकट का कारण बन गया है। अब खाड़ी देश इस रास्ते के अलावा दूसरे विकल्पों पर काम करना चाहते हैं।
सऊदी अरब को पहले से बिछी पाइपलाइन का फायदा
सऊदीअरब ने पहले ही लाल सागर तक पाइपलाइन बिछा रखी थी। इसका उसे बड़ा फायदा मिला। होर्मुज बंद होने के बावजूद सऊदी अरब पाइपलाइन के जरिए लाल सागर तक तेल भेजता रहा। उसकी तेल सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा। सऊदी अरब अपने पुराने इन्फ्रास्ट्रक्चर का पूरा फायदा उठा रहा है।
हाइफा रूट पर भी जोर
इजरायल केहाइफा पोर्ट के जरिए अरब सागर और भूमध्य सागर को जोड़ने वाले रूट पर भी चर्चा चल रही है। इस रूट से मध्य एशिया तक यूरोप का रास्ता होर्मुज से गुजरे बिना ही साफ हो जाएगा। इस इलाके में पाइपलाइन के जरिए तेल की सप्लाई हो सकती है। हालांकि, सिर्फ एक पाइपलाइन से काम नहीं चलेगा। इसके साथ सड़क मार्ग और रेलवे की भी जरूरत होगी। यह विचार भविष्य के लिए है, फिलहाल इसे तुरंत अपनाना संभव नहीं है।
IMEC कॉरिडोर पर फिर शुरू हुई चर्चा
लेबनान कीकंस्ट्रक्शन कंपनी कैट ग्रुप के सीईओ क्रिस्टोफर बुश ने कहा है कि इस तरह के पाइपलाइन प्रोजेक्ट में इंटरेस्ट बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस पर काम शुरू हो गया है। अमेरिका और भारत द्वारा समर्थित IMEC कॉरिडोर की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। यह कॉरिडोर रेलवे नेटवर्क, पाइपलाइन और सड़क मार्ग से बनेगा। इसमें यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल शामिल होंगे। सबसे बड़ी चुनौती सऊदी अरब और इजरायल के हाइफा को जोड़ना है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने भी इस वैकल्पिक रास्ते का समर्थन किया है।
भारत की अहम भूमिका
I2U2 समूह मेंभारत ने पिछले महीने भी IMEC पर चर्चा की थी। इस कॉरिडोर का ऐलान भारत में आयोजित जी20 सम्मेलन में किया गया था। I2U2 समूह में भारत, इजरायल, यूएई और अमेरिका शामिल हैं। इस वैकल्पिक रास्ते में भारत की बड़ी भूमिका हो सकती है। यह कॉरिडोर सीधे भारत तक जुड़ा हुआ है।

